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अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का युद्धविराम: क्या है इस समझौते की अहमियत?

अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमति जताई है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संभावित युद्ध को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है। जानें इस समझौते की प्रमुख शर्तें और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
 

नई दिल्ली में महत्वपूर्ण वार्ता


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमति जताई है, लेकिन इसे लागू करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति और ईरान के सर्वोच्च नेता की मंजूरी का इंतजार है.


कूटनीतिक सफलता की ओर एक कदम

मध्य पूर्व में तीन महीनों से चल रहे सैन्य तनाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता हासिल हुई है। अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों ने 60 दिनों के अस्थाई समझौते के प्रारूप पर सहमति बनाई है। इस महत्वपूर्ण युद्धविराम को लागू करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी आवश्यक है.


निर्णय अभी भी लंबित

अधिकारियों के अनुसार, इस 60 दिवसीय प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संभावित पूर्ण युद्ध को रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोलना और अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई आर्थिक नाकेबंदी को समाप्त करना है। हालांकि, दोनों पक्षों के वार्ताकारों ने पर्दे के पीछे कूटनीतिक सहमति बना ली है, लेकिन यह सौदा अभी भी लटका हुआ है.


ईरान का अंतिम मसौदे से इनकार

ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने किसी भी अंतिम मसौदे के अस्तित्व से इनकार किया है। ईरानी सूत्रों का कहना है कि जब भी कोई ठोस समझौता होगा, उसे पहले पाकिस्तानी मध्यस्थों के साथ साझा किया जाएगा और फिर इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी.


समझौते की प्रमुख शर्तें

इस द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों ने संकट को टालने के लिए एक चरणबद्ध फॉर्मूला तैयार किया है.


यूरेनियम और परमाणु कार्यक्रम: समझौते के तहत ईरान यह सुनिश्चित करेगा कि वह परमाणु हथियार बनाने का प्रयास नहीं करेगा। इन 60 दिनों की चर्चा में ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम को वहां से हटाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी.


होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना: वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से मुक्त किया जाएगा, इसके बदले में कोई टोल या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा.


समुद्री सुरंगों को हटाना: ईरान को पहले 30 दिनों के भीतर उन सभी नौसैनिक बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना होगा, जिन्हें ईरानी नौसेना और आईआरजीसी ने इस जलमार्ग में बिछाया था.


अमेरिकी नाकेबंदी की समाप्ति: ईरान द्वारा उठाए गए कदमों के बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से हटाएगा, जो व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर निर्भर करेगा.