अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौता: क्या स्थायी शांति संभव है?
अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौता
एक सप्ताह पहले अमेरिका और ईरान ने फ्रांस में एक अस्थायी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति समाप्त हो गई है। यह एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि दोनों के बीच पिछले 50 वर्षों से दुश्मनी चली आ रही थी। इस समझौते के बाद तुरंत लड़ाई रुक गई और स्थायी शांति की वार्ता शुरू हो गई। हालांकि, रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ गया।
संघर्ष और जवाबी कार्रवाई
यूएस सेंट्रल कमांड ने आरोप लगाया कि 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले एक जहाज पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया, जिसके जवाब में 26 जून को अमेरिकी बलों ने ईरान पर हमला किया। ईरान ने इसे संघर्ष विराम का उल्लंघन बताया, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक मूर्खतापूर्ण कार्रवाई कहा।
सीज फायर का लाभ
होर्मुज की खाड़ी अब फिर से खुल गई है, जो कि विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। पहले ईरान ने इसे बंद कर रखा था, जिससे तेल की कमी और कीमतों में वृद्धि हुई थी। अब जहाज फिर से गुजर रहे हैं, जिससे अमेरिका में तेल की कमी और महंगाई का खतरा कम हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि यह मार्ग बंद रहा तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है।
ईरान को मिलने वाले लाभ
ईरान अब बिना किसी रुकावट के अपने तेल का व्यापार कर सकता है। पहले अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसे कम कीमत पर तेल बेचना पड़ता था, लेकिन अब वह प्रतिदिन 20 लाख बैरल तक तेल बेच सकता है। चीन ईरान का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।
सीज फायर की स्थिति
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच झड़पें हुई हैं, लेकिन अधिकांश अमेरिकी मीडिया का मानना है कि तनाव और नहीं बढ़ेगा। CNN का कहना है कि यह एक अस्थायी ठहराव है, और दोनों पक्ष फिलहाल लड़ाई फिर से शुरू करने का जोखिम नहीं उठा सकते।
पश्चिम एशिया में शांति की संभावना
ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण निरीक्षण की अनुमति नहीं दी गई है, केवल बातचीत चल रही है। लेबनान में हिजबुल्लाह के मामले में भी तनाव बना हुआ है। यदि लेबनान और इजरायल शांति वार्ता में आगे बढ़ते हैं, तो हिज्बुल्लाह गृह युद्ध की धमकी दे रहा है। इजराइल इस समझौते को बाध्यकारी नहीं मानता और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
संभावित टकराव के मुद्दे
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच स्थायी शांति तभी संभव है जब लेबनान, ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर सहमति बन सके। यदि समझौता नहीं होता है, तो ऐसे टकराव जारी रह सकते हैं।