अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता: क्या है इसके पीछे की कहानी?
नई दिल्ली में ऐतिहासिक समझौते की घोषणा
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष और सैन्य तनाव को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्ध को समाप्त करना और क्षेत्र में शांति स्थापित करना है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है। यह समझौता गहन कूटनीतिक वार्ताओं और प्रयासों का परिणाम है।
कूटनीति के पीछे की रणनीतियाँ
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते की रूपरेखा पहले ही तैयार की जा चुकी थी। प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत, पिछले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बकर कलीबाफ ने इस मसौदे पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस डिजिटल हस्ताक्षर प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उपस्थित थे।
राष्ट्राध्यक्षों द्वारा हस्ताक्षर
रविवार को प्रशासनिक स्तर पर मिली सफलता के बाद, बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस पर हस्ताक्षर किए। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम ने इस शांति समझौते को वैश्विक स्तर पर औपचारिक और कानूनी रूप से मजबूत किया है।
समझौते की प्रक्रियाएँ
समझौते की आधिकारिक घोषणा से पहले, बुधवार शाम अमेरिका ने शांति समझौते का अंतिम मसौदा प्रस्तुत किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी संकेत दिए कि दोनों देशों के प्रमुख इस डील पर अंतिम मुहर लगा रहे हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर औपचारिक प्रक्रियाएँ पूरी की जाएँगी।
समझौते की प्रमुख शर्तें
इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों देशों ने कई संवेदनशील बिंदुओं पर सहमति जताई है। समझौते के अनुसार, लेबनान सहित सभी सक्रिय मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे। अंतिम व्यापक समझौते पर सहमति बनाने के लिए 60 दिनों का समय निर्धारित किया गया है।
नौसैनिक नाकेबंदी का हटना
आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटाया जाएगा और ईरान के व्यापार में वाशिंगटन का हस्तक्षेप समाप्त होगा। अगले 30 दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक पोतों की आवाजाही बहाल की जाएगी।
परमाणु हथियारों पर प्रतिबद्धता
इसके बदले में, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक विकास योजना पेश की है। ईरान ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह किसी भी प्रकार का परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि संवर्धित यूरेनियम के प्रबंधन पर अंतिम समझौते से पहले चर्चा की जाएगी।