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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव: केशम द्वीप पर सैन्य हमले की रिपोर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर गुप्त सैन्य हमले किए हैं। इस हमले के बाद, इजरायल और अमेरिका के बीच रणनीतिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने बातचीत के जरिए समझौते की संभावनाओं पर जोर दिया है। जानें इस स्थिति के पीछे की वजहें और आगे की संभावनाएं।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। एक प्रमुख समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर गुप्त सैन्य हमले किए हैं। इस हमले के बाद, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में स्थित इस द्वीप से लगातार धमाकों की आवाजें सुनाई दी हैं, जिसकी पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया ने भी की है।


सीमित सैन्य अभियान का हिस्सा

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये हमले हाल के हफ्तों में चलाए गए सीमित सैन्य अभियानों का हिस्सा हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका जानबूझकर इन हमलों को सीमित रख रहा है ताकि ईरान के साथ बड़े युद्ध की शुरुआत का संकेत न मिले। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक हैं, और दोनों देशों के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है।


अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद

इस हमले के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद उभरकर सामने आए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव डाला है कि वे मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर बड़े हमले की योजना बनाएं। वहीं, ट्रंप का मानना है कि फिलहाल कूटनीतिक बातचीत को एक मौका दिया जाना चाहिए। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे चुनावों के बाद हमले की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने इस तरह की किसी योजना से साफ इनकार किया।


समझौते की संभावनाएं

तनाव और हमलों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं, जिससे नए हमलों की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने ईरान के सुरक्षा प्रमुख को एक पत्र भेजा था, जिसमें हेल्थ सामग्री और मानवीय सहायता देने की बात की गई थी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत में सकारात्मक प्रगति हुई है और दोनों देश समाधान की दिशा में आशावादी हैं।


स्थिति की गंभीरता

फरवरी से चल रहे इस संघर्ष के बीच केशम द्वीप पर हुए हमले ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है। एक ओर, इजरायल अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई का दबाव बना रहा है, जबकि दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन मिडटर्म चुनावों के बाद कूटनीतिक प्रयासों के जरिए युद्ध को रोकने की अंतिम कोशिशों में जुटा है।