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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, सीजफायर पर सवाल उठे

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है, जब ईरान ने अमेरिकी जहाजों पर हमला किया। ट्रंप ने इसे 'लव टैप' कहा, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। क्या सीजफायर अब भी बरकरार है? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और ट्रंप के बयान के पीछे की सच्चाई।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर लागू है, लेकिन हाल ही में स्थिति फिर से तनावपूर्ण होती दिखाई दे रही है। 7 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक घटना ने युद्ध की स्थिति को फिर से भड़काने का काम किया। ईरान ने अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर जोरदार हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, उनके तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, यूएसएस राफेल पराल्टा और यूएसएस मेसन, अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान, ईरान ने उकसाने वाली कार्रवाई करते हुए मिसाइलें, ड्रोन और छोटी नावें भेजकर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, अमेरिकी सेना ने इन सभी खतरों को नाकाम कर दिया और तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के काशम और बंदर अब्बास जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया।


ट्रंप का बयान और सीजफायर की स्थिति

इन हमलों में उन स्थानों को नष्ट कर दिया गया है, जहां से ईरान ने ड्रोन और मिसाइलें लॉन्च की थीं। इसके अलावा, ईरान के कमांड सेंटर और खुफिया निगरानी केंद्रों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान के मिनाप शहर और हॉर्मोसगान प्रांत में भी धमाकों की आवाजें सुनाई दी हैं। इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक 'लव टैप' करार दिया है, यह कहते हुए कि ईरानी हमलों में अमेरिकी जहाज को कोई नुकसान नहीं हुआ है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी ड्रोन हवा में गिर रहे थे जैसे कोई तितली गिरती है। जब मीडिया ने ट्रंप से पूछा कि क्या सीजफायर अब भी बरकरार है, तो उन्होंने कहा कि अभी सीजफायर है, लेकिन ईरान ने हमारे साथ खिलवाड़ किया है।


ईरान का जवाबी हमला

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर जवाबी हमला किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने बताया कि इस हमले में जहाज-रोधी बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन शामिल थे। यह हमला अमेरिका द्वारा किए गए एक जवाबी हमले का हिस्सा था। ईरान ने कहा कि यह हमला युद्धविराम के उल्लंघन के परिणामस्वरूप हुआ और इससे अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हुआ। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय कमान ने पुष्टि की कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों द्वारा निशाना बनाए जाने के बावजूद अमेरिकी युद्धपोतों को कोई नुकसान नहीं हुआ।