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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: ट्रंप ने रद्द की बातचीत, सैन्य विकल्पों पर चर्चा

अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी वार्ताओं को रद्द कर दिया है और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की जा रही है। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों की सहायता का संकेत दिया है, जबकि ईरान ने अमेरिका पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव


नई दिल्ली: ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के चलते अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में गंभीर तनाव उत्पन्न हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और व्हाइट हाउस की बैठकों ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन अब तेहरान के खिलाफ एक अधिक आक्रामक रुख अपनाने की योजना बना रहा है।


ट्रंप ने बातचीत को किया रद्द

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी वार्ताओं को रद्द कर दिया है। इसे तेहरान के प्रति सख्त रुख और संभावित सैन्य या राजनीतिक कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।


ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की सहायता कर सकता है, हालांकि इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन के भीतर मतभेद भी उभर रहे हैं।


व्हाइट हाउस में सैन्य विकल्पों पर चर्चा

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, मंगलवार को व्हाइट हाउस में उच्च अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा की गई।


Axios के अनुसार, उसी दिन सुबह राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने ईरान की स्थिति पर प्रतिक्रिया के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया, हालांकि इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप शामिल नहीं हुए।


एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि चर्चा अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी भी सैन्य कार्रवाई पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।


रेजा पहलवी के साथ गुप्त बैठक

Axios की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान के निर्वासित पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के साथ एक गुप्त बैठक की।


एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, यह बैठक ईरान में पिछले 15 दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के संदर्भ में हुई। यह ट्रंप प्रशासन और ईरानी विपक्ष के बीच पहली उच्च स्तरीय बातचीत मानी जा रही है।


रेजा पहलवी, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटाए गए शाह के बेटे हैं, वर्तमान में अमेरिका में रहकर ईरानी विपक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं।


गैर-सैन्य विकल्पों पर ध्यान

सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल की बंद कमरे की बैठकों में कहा है कि प्रशासन फिलहाल प्रदर्शनकारियों की सहायता के लिए गैर-सैन्य विकल्पों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।


इन विकल्पों में कूटनीतिक दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और राजनीतिक समर्थन शामिल हो सकते हैं। कई राजनीतिक सहयोगियों ने एक और उच्च जोखिम वाले सैन्य ऑपरेशन या बड़े युद्ध की आशंका भी जताई है।


ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई, तो अमेरिका "बहुत सख्त कार्रवाई" करेगा।


CBS न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "अगर वे उन्हें फांसी देंगे, तो आप कुछ चीजें होते देखेंगे। हम बहुत मजबूत कदम उठाएंगे।"


इससे पहले, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरानियों से प्रदर्शन जारी रखने की अपील की थी और लिखा था कि "मदद रास्ते में है।"


ईरान का कड़ा जवाब

ट्रंप के बयानों के कुछ ही घंटों बाद, ईरान की ओर से कड़ा जवाब आया। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर हमला बोला।


उन्होंने लिखा, "हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम घोषित करते हैं। पहला ट्रंप। दूसरा नेतन्याहू।"


लारीजानी ने अमेरिका और इजरायल पर देश में हिंसा भड़काने और हजारों मौतों का जिम्मेदार ठहराया।


संयुक्त राष्ट्र में ईरान का आरोप

ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी ने भी ट्रंप पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।


उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव एंतोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर कहा कि नागरिकों, खासकर युवाओं की मौतों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं।


ईरान में हालात की गंभीरता

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के अनुसार, ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 2,403 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।


इनमें 18 साल से कम उम्र के 12 बच्चे भी शामिल हैं। HRANA के अनुसार, अब तक पूरे देश में कम से कम 18,137 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


ईरानी सरकारी टीवी ने पहली बार मौतों के आंकड़े को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि देश में "कई शहीद" हुए हैं। ये प्रदर्शन अब सीधे धार्मिक शासन के खिलाफ चुनौती बन चुके हैं।