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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: सैन्य कार्रवाई की नई लहर

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक नई दिशा में बढ़ रहा है। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, जबकि अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की है। इस लेख में हम इस बढ़ते तनाव के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे, जिसमें ओमान के दुकम बंदरगाह पर हमले और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले शामिल हैं। जानें इस संघर्ष का क्या प्रभाव पड़ सकता है।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब और भी गंभीर होता जा रहा है। जब ईरान की आईआरजीसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों और कंटेनरों पर हमले किए, तो अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की। यह अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ तीसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई है।


ईरान का प्रतिरोध

ईरान ने अमेरिकी हमलों के सामने झुकने से इनकार कर दिया है और लगातार जवाबी हमले कर रहा है। उसने ओमान, कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपने निशाने पर लिया है।


ओमान के दुकम बंदरगाह पर हमले

तनाव के इस माहौल में, ईरान ने ओमान के दुकम बंदरगाह पर कई हमले किए हैं। ईरान की सेना का कहना है कि उसने वहां अमेरिकी विमानवाहक जहाजों की सहायता करने वाले प्लेटफॉर्म पर बमबारी की है। ईरान के अनुसार, यह हमला अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब है।


ईरान की सेना का बयान

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा है कि इस सैन्य अभियान में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को रसद पहुंचाने वाले केंद्रों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के लिए 'अमेरिकी-जायोनी दुश्मन' जिम्मेदार हैं।


खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले

दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी बमबारी के जवाब में, ईरानी सेना ने कुवैत, बहरीन और अन्य देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए।


अमेरिका की जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने तीसरे दौर के हमलों को पूरा कर लिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 11 जुलाई को इस कार्रवाई की जानकारी दी। अमेरिका ने ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।


व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी प्रयास

कमांडर इन चीफ के आदेश पर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हाल ही में तीन रातों तक ईरान के 300 से अधिक ठिकानों पर बमबारी की। इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की ताकत को कमजोर करना है, ताकि व्यापारिक जहाज बिना किसी डर के समुद्री रास्तों से गुजर सकें।