अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: हमले और जवाबी कार्रवाई
अमेरिका-ईरान के बीच शांति प्रयास विफल
अमेरिका और ईरान के बीच शांति की सभी कोशिशें असफल हो गई हैं। हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट एक अमेरिकी हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और अमेरिका एक शक्तिशाली जवाबी हमला करेगा। ट्रंप की चेतावनी के बाद, अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद कर दिया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम ईरान की बार-बार की उकसाने वाली गतिविधियों के जवाब में उठाया गया है। ईरान ने भी बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान की मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास, मिनाब और सिरीक में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। ईरान का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है, जबकि अमेरिका का कहना है कि वाणिज्यिक जहाज अभी भी वहां से गुजर रहे हैं। अमेरिका और यूरोप के 22 देशों ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह उनकी धरती पर हमले बंद करे। इन देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि लोगों की हत्या, धमकी या अपहरण की कोशिशें समाप्त होनी चाहिए। इससे पहले, बुधवार को भी अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे.
ईरान का जवाबी हमला
ईरान ने अमेरिका पर हुए हमले के बाद बहरीन, कुवैत और जोर्डन में उन ठिकानों पर हमले किए, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। दो महीने के सीजफायर के बाद, एक सप्ताह में तीन बार इस तरह के हमले हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार धमकी दी है कि ईरान ने गलती की है और उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि इस बार हमले और भी तीव्र होंगे.
अमेरिकी सेनाओं की कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTOM) ने एक बयान जारी कर कहा है कि उसने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। CENTOM का कहना है कि ये हमले मिलिट्री सर्विलांस, कम्युनिकेशन सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाकर किए गए। इसके अलावा, अमेरिका के मरीन कॉर्प्स, एयर फोर्स और नेवी ने उन स्थानों को भी निशाना बनाया जो अमेरिकी सेना और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे.
संघर्ष का समाधान
ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर इस युद्ध को समाप्त करना है, तो ईरान को समझौता करना चाहिए। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका वास्तव में कोई समझौता करना चाहता है, तो उसे धमकी देने वाले रवैये से बाहर आना होगा। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत सईद इरवानी ने कहा है कि ईरान ने कभी भी धमकी या दबाव में समझौता नहीं किया है। वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख स्पष्ट है; वे चाहते हैं कि ईरानी सरकार को समाप्त किया जाए, उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म किया जाए और लेबनान में ईरान के समर्थन से काम करने वाले हिज्बुल्लाह को नष्ट किया जाए.