अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव: हालिया हमले की पूरी जानकारी
अमेरिका का ईरान पर हमला
अमेरिका और ईरान के बीच शांति की संभावनाएं अब धूमिल होती जा रही हैं। भारतीय समयानुसार मंगलवार और बुधवार की रात को अमेरिका ने ईरान पर हमला किया। इस बार इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जवाब देने की कोशिश की, तो उसका नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।
ईरान की प्रतिक्रिया
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों में, जैसे कि बंदर अब्बास, कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके अलावा, इराक के एरबिल में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी भी ईरान ने ली है।
IRGC का दावा
अलजज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, IRGC ने जोर्डन के अकाबा में स्थित अमेरिकी ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है। IRGC का दावा है कि इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। ईरान ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने एक शादी समारोह पर हमला किया, जिसमें चार लोग, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था, मारे गए। ईरान ने इन लोगों को शहीद बताया है।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान
इस हमले की जानकारी देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर लिखा कि जब वह यह बातें कर रहे थे, तब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी ठिकानों पर हमले कर रहा था। उन्होंने कहा कि ये हमले ईरान की नाकाम कोशिशों का जवाब हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जवाब देने की कोशिश की, तो अमेरिका और भी बड़ा हमला करेगा।
CENTCOM की जानकारी
कुछ घंटों बाद, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने अपने हमले पूरे कर लिए हैं। CENTCOM के अनुसार, इस हमले में IRGC के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें एयर डिफेंस, राडार सिस्टम, और अन्य महत्वपूर्ण ठिकाने शामिल हैं। CENTCOM ने यह भी कहा कि IRGC ने होर्मुज में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया और वाणिज्यिक जहाजों पर भी हमले किए।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिक
CENTCOM ने बताया कि वर्तमान में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व में तैनात हैं और वे किसी भी खतरनाक ऑपरेशन के लिए तैयार हैं।