अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष: ट्रंप का परमाणु विकल्प
संघर्ष की आशंका
दक्षिणपंथी पत्रकार चकर कार्लसन ने बताया है कि अमेरिका ईरान के गुप्त परमाणु संयंत्रों पर हमले की योजना बना रहा है। इस खबर ने वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। यह स्पष्ट है कि अमेरिका में मिड टर्म चुनावों में ट्रंप को बड़ा झटका लग सकता है। क्या वह चुनावों में हार को पलटने के लिए परमाणु हमले जैसा गंभीर कदम उठाएंगे? कहा जा रहा है कि मिड टर्म चुनावों के बाद ट्रंप एक ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सकते हैं जो ईरान के परमाणु संयंत्रों को नष्ट कर देगा, जिससे ईरान को लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप के करीबी भी इस संभावना को नकार नहीं रहे हैं। नेतन्याहू को भी इस तरह के कदम की आवश्यकता है ताकि वह सत्ता में बने रह सकें। सवाल यह है कि ट्रंप और नेतन्याहू की इस सनक का खामियाजा कौन भोगेगा?
आर्थिक प्रभाव
ईरान पर हमले का सबसे बड़ा असर उस पर पड़ेगा, लेकिन इसका प्रभाव भारत पर भी होगा। इससे भारत की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है, वैश्विक व्यापार में बाधा आएगी, और महंगाई बढ़ने का खतरा उत्पन्न होगा। यदि यह संघर्ष टल सकता है, तो यह सभी के लिए बेहतर होगा। लेकिन दोनों नेताओं की हार की संभावना को देखते हुए, यह स्थिति और भी जटिल हो जाती है। ट्रंप और उनकी पार्टी को मिड टर्म चुनावों में कांग्रेस में बहुमत प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। सवाल यह है कि अमेरिकी सेना परमाणु विकल्प का उपयोग क्यों करेगी?
नेतन्याहू का दबाव
टकर कालसन का कहना है कि नेतन्याहू ट्रंप पर ईरान के अंडरग्राउंड ठिकानों पर हमले का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप अभी निर्णय लेने में हिचकिचा रहे हैं, लेकिन 7 नवंबर तक वह कोई फैसला ले सकते हैं। उपराष्ट्रपति जे वेंस और स्टीव विटकॉफ समझौते के लिए दबाव डाल रहे हैं। यह दावा किया जा रहा है कि ट्रंप जल्द ही ईरान पर हमले का निर्णय ले सकते हैं। क्या ये खबरें चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं या वास्तव में ईरान पर हमले का खतरा है? नेतन्याहू अमेरिका के मिड टर्म चुनावों के बाद ईरान पर हमले का दबाव बना रहे हैं, जबकि ट्रंप बातचीत को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं।
नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति
नेतन्याहू की इजराइल में वापसी की संभावना कम होती दिख रही है। चुनाव परिणामों के बाद, ऐसा लगता है कि उन्हें सत्ता में लौटने का अवसर नहीं मिलेगा। अमेरिका पर हमले का दबाव डालकर वह कुछ और समय सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। नेतन्याहू एक कुशल राजनीतिक खिलाड़ी हैं और वह किसी भी तरह से सत्ता में बने रहने के लिए प्रयासरत रहेंगे।