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अमेरिका और ग्रीनलैंड के बीच नियंत्रण विवाद: ट्रंप का दृष्टिकोण

इस लेख में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा और इसके पीछे की घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। 2019 से लेकर 2026 तक, ट्रंप की रणनीतियों और डेनमार्क के नेताओं की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया है। यह विवाद न केवल अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव को दर्शाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ग्रीनलैंड की भूमिका को भी उजागर करता है।
 

ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि का इतिहास

2019 में, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा पहली बार सार्वजनिक हुई। यह मामला तब शुरू हुआ जब ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने में रुचि है, हालांकि उन्होंने इसे प्राथमिकता नहीं बताया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इसे बेतुकी चर्चा करार दिया।


इसके बाद, ट्रंप ने अपनी डेनमार्क यात्रा रद्द कर दी, यह कहते हुए कि प्रधानमंत्री के बयान ने उन्हें निराश किया। 2024 में, ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड में रुचि दिखाई और इसे अमेरिका के लिए आवश्यक बताया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे बिक्री के लिए नहीं हैं।


सैन्य बल का उपयोग और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

2025 में, ट्रंप के बेटे ने ग्रीनलैंड का दौरा किया और ट्रंप ने सैन्य बल के उपयोग की संभावना को खारिज नहीं किया। ग्रीनलैंड में चुनावों के बाद, सभी राजनीतिक दलों ने अमेरिका के नियंत्रण का विरोध किया।


अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड के सुरक्षा निवेश की कमी पर चिंता जताई, जबकि डेनमार्क के विदेश मंत्री ने अमेरिका की आलोचना की। ट्रंप ने सैन्य बल के विकल्प को हमेशा खुला रखा।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और समझौते

2026 में, ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की चर्चा को फिर से तेज किया। डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसा करना नाटो के अंत के समान होगा। यूरोप के नेताओं ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया।


ट्रंप ने ग्रीनलैंड में एक अस्पताल जहाज भेजने की योजना बनाई, जिसे ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने ठुकरा दिया। जुलाई 2026 में, ट्रंप ने फिर से कहा कि ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में होना चाहिए, जबकि फ्रेडरिक्सन ने इसे बिक्री के लिए नहीं बताया।