अमेरिका और चीन में वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें: क्या है इसके पीछे का सच?
अमेरिका और चीन में वैज्ञानिकों की रहस्यमयी घटनाएं
इन दिनों अमेरिका और चीन जैसे शक्तिशाली देशों में एक अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जिसमें प्रमुख रक्षा वैज्ञानिकों की अचानक मौतें और गायब होने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यह संयोग है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि जिन वैज्ञानिकों के साथ ये घटनाएं हो रही हैं, वे सभी संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में कार्यरत थे, जिससे मामला और भी गंभीर बनता है।
अमेरिका में वैज्ञानिकों के लापता होने की घटनाएं
हाल के समय में अमेरिका में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां वैज्ञानिक या रक्षा से जुड़े अधिकारी अचानक लापता हो गए या संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। इनमें NASA, एयर फोर्स और न्यूक्लियर रिसर्च से जुड़े लोग शामिल हैं।
मेजर जनरल विलियम नील मैककैसलैंड का मामला सबसे चर्चित है। वे पहले एयर फोर्स रिसर्च लेबोरेटरी के कमांडर रह चुके थे और UFO जैसे संवेदनशील मामलों की जांच कर चुके थे। फरवरी 2026 में वे रोज की तरह टहलने निकले, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटे। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने अपना फोन, चश्मा और स्मार्टवॉच घर पर ही छोड़ दिया था और केवल एक रिवॉल्वर अपने साथ लिया था। कई महीनों की खोजबीन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला।
इसी तरह मोनिका रेजा का मामला भी रहस्यमय है। वे NASA के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में एयरोस्पेस इंजीनियर थीं और एडवांस मेटल टेक्नोलॉजी पर काम कर रही थीं। कैलिफोर्निया के जंगल में दोस्तों के साथ ट्रेकिंग के दौरान वे अचानक समूह से पीछे रह गईं और फिर गायब हो गईं। सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।
एक और चौंकाने वाला मामला जोशुआ ले ब्लैंक का है, जो न्यूक्लियर प्रोपल्शन प्रोजेक्ट से जुड़े थे। वे अपनी कार में मृत पाए गए, जिसमें आग लगी हुई थी। परिवार का कहना है कि वे उस दिन काम पर नहीं पहुंचे थे और अपना फोन और वॉलेट घर पर ही छोड़ गए थे। इसके अलावा लॉस एलामोस न्यूक्लियर लैब से जुड़े कुछ अन्य लोग भी लापता हुए हैं, जिनमें मेलिसा कैसियास और एंथनी चावेज जैसे नाम शामिल हैं। कई मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला है- लोग घर से अकेले निकलते हैं, जरूरी सामान नहीं लेते और फिर उनका कोई पता नहीं चलता।
चीन में भी वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौतें
सिर्फ अमेरिका ही नहीं, चीन में भी पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों की असामान्य मौतों की संख्या बढ़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम 9 वैज्ञानिक अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
फेंग यांगहे का मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा। वे 38 साल के प्रोफेसर थे और मिलिट्री AI से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। जुलाई 2023 में देर रात बीजिंग में उनकी कार दुर्घटना में मौत हो गई। सरकारी बयान में उनकी मौत को 'सरकारी ड्यूटी के दौरान बलिदान' बताया गया, जो आमतौर पर सैनिकों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे संदेह और गहरा गया।
अन्य मामलों में भी अजीब समानताएं देखने को मिलती हैं। चेन शुमिंग, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ, 2018 में कार हादसे में मारे गए। झोउ गुआंगयुआन, केमिस्ट, दिसंबर 2023 में अचानक मौत। झांग शियाओशिन, स्पेस टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ, 2024 में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। फांग दाइनिंग, हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी से जुड़े वैज्ञानिक, विदेश में मेडिकल इमरजेंसी के कारण मारे गए। यान होंग, हाइपरसोनिक रिसर्चर, बीमारी से मौत। इन सभी वैज्ञानिकों का काम सीधे-सीधे चीन की सैन्य ताकत से जुड़ा था, जैसे हाइपरसोनिक हथियार, AI आधारित युद्ध प्रणाली और न्यूक्लियर रिसर्च।
क्या ये घटनाएं किसी बड़ी साजिश का संकेत हैं?
इन घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका के कुछ नेताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ संयोग नहीं हो सकता। रिपब्लिकन सांसद एरिक बर्लिसन ने खुलकर कहा है कि अमेरिका की टक्कर चीन, रूस और ईरान जैसे देशों से है और ऐसे में वैज्ञानिकों को निशाना बनाया जा सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इन घटनाओं को गंभीर बताया है। वहीं, FBI ने इन मामलों की जांच शुरू कर दी है।
कुछ जानकारों का मानना है कि यह किसी विदेशी एजेंसी का गुप्त ऑपरेशन हो सकता है, जिसका मकसद तकनीकी बढ़त को कमजोर करना है। हालांकि, अभी तक किसी भी तरह का ठोस सबूत सामने नहीं आया है। कई विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इतने बड़े संगठनों में काम करने वाले हजारों लोगों में से कुछ दुर्घटनाएं या व्यक्तिगत कारणों से मौतें होना असामान्य नहीं है। लेकिन जो बात इन घटनाओं को अलग बनाती है, वह है उनका पैटर्न- घर से बिना जरूरी चीजों के निकलना, अकेले जाना और फिर हमेशा के लिए गायब हो जाना। यही वजह है कि शक और गहराता जा रहा है।
इन घटनाओं का महत्व
इन वैज्ञानिकों का काम सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं था, बल्कि वे अपने-अपने देशों की सुरक्षा और भविष्य की युद्ध रणनीति की नींव तैयार कर रहे थे। हाइपरसोनिक मिसाइलें, मिलिट्री AI, स्पेस डिफेंस और न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे क्षेत्र आने वाले समय में युद्ध का चेहरा बदल सकते हैं। अगर इन क्षेत्रों के विशेषज्ञ अचानक कम होते जाते हैं, तो इसका सीधा असर देश की रक्षा क्षमता पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और चीन दोनों ही इन मामलों को लेकर सतर्क हो गए हैं और जांच तेज कर दी गई है।