अमेरिका का ईरान पर दबाव: आर्थिक लड़ाई और अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी
अमेरिका की नई रणनीति
नई दिल्ली: अमेरिका अब ईरान को घेरने के लिए कई मोर्चों पर सक्रिय हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की योजना बनाई है, जिसे उन्होंने इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक लड़ाई करार दिया है। हालांकि, इस संदर्भ में कोई आधिकारिक आदेश अभी तक जारी नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका के अगले कदम से कौन-कौन से देश, कंपनियां या वित्तीय संस्थान प्रभावित होंगे।
आर्थिक दबाव के साथ समुद्री गतिविधियाँ
ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सकता है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य तेहरान तक पहुंचने वाले धन के स्रोतों को रोकना है। अमेरिका ने उन देशों को भी चेतावनी दी है जो ईरान को आर्थिक सहायता या अन्य रूप में सहयोग प्रदान करते हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्रवाई का पूरा खाका अभी तक सामने नहीं आया है।
अमेरिका का दबाव केवल आर्थिक स्तर तक सीमित नहीं है। समुद्री क्षेत्र में भी अमेरिका अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, 20 अगस्त तक ईरान की नाकाबंदी के दौरान 67 व्यापारिक जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा। इसके अलावा, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया और दो जहाजों पर चढ़कर जांच की गई। अरब सागर में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियाँ लगातार जारी हैं। इसी दौरान USS Boxer से MV-22B Osprey विमानों की उड़ान भी देखी गई, जो ईरान पर लागू अमेरिकी नाकाबंदी से जुड़े अभियान का हिस्सा है।
हिज्बुल्लाह पर नए प्रतिबंध
ईरान पर बढ़ते दबाव के बीच अमेरिका ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ भी नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने संगठन के ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स से संबंधों का हवाला दिया है। अमेरिका ने हिज्बुल्लाह से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को भी निशाने पर लिया है, जिसका उद्देश्य संगठन तक पहुंचने वाले धन के रास्तों को सीमित करना है। हालांकि, यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ प्रस्तावित व्यापक आर्थिक अभियान से अलग मानी जा रही है।
अंतरिक्ष में नई योजनाएँ
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अपनी क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप ने एक नए मेमो पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अंतरिक्ष मिशनों की रफ्तार तेज करने की योजना बनाई गई है। नए लक्ष्य के अनुसार, साल 2030 तक अमेरिका हर साल 1000 से अधिक रॉकेट लॉन्च और री-एंट्री मिशन संभालने की क्षमता विकसित करना चाहता है। फिलहाल, दुनिया की नजर ट्रंप के अगले आधिकारिक आदेश पर टिकी है, जिससे ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान की असली तस्वीर साफ हो सकती है।