अमेरिका का नया टैरिफ प्रस्ताव: भारत और चीन पर बढ़ती नजरें
वैश्विक व्यापार युद्ध की नई लहर
एक बार फिर वैश्विक व्यापार युद्ध की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत और चीन समेत 60 प्रमुख देशों से आयात पर 12.5% तक का अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाने का एक कड़ा प्रस्ताव पेश किया है। वॉशिंगटन का आरोप है कि ये देश 'ज़बरदस्ती मज़दूरी' से बने सामानों के आयात को रोकने में असफल रहे हैं। यह प्रस्ताव यूएस ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 की धारा 301 के तहत लाया गया है, जो पहले भी चीन से आयात पर टैरिफ लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.
प्रस्ताव की समीक्षा और संभावित प्रभाव
इस प्रस्ताव की अभी समीक्षा चल रही है और अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यदि इसे लागू किया गया, तो यह अमेरिका में आयात की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता को बढ़ा सकता है.
यूएस ट्रेड प्रतिनिधि का प्रस्ताव
यूएस ट्रेड प्रतिनिधि (USTR) ने भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों से होने वाले आयात पर 12.5% तक के अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव दिया है. USTR का कहना है कि प्रभावित देशों ने ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामानों पर प्रतिबंध लगाने में विफलता दिखाई है.
भारत और चीन पर विशेष ध्यान
USTR के निष्कर्षों के अनुसार, भारत और चीन उन 54 देशों में शामिल हैं जो ज़बरदस्ती मज़दूरी से जुड़े सामानों पर कानूनी प्रतिबंध लगाने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रहे हैं. USTR ने भारत की नीतियों को अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालने वाला बताया है.
सेक्शन 301 का महत्व
यूएस ट्रेड एक्ट, 1974 का सेक्शन 301 अमेरिकी सरकार को विदेशी व्यापार के तरीकों की जांच करने की अनुमति देता है. यह कानून तब चर्चा में आया जब डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इसे चीन पर टैरिफ लगाने के लिए आधार बनाया गया.
कौन से देश शामिल हैं?
भारत और चीन के अलावा, इस सूची में यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम, वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, कनाडा, मेक्सिको और कई खाड़ी देश शामिल हैं. USTR ने कहा कि कुछ देशों में पहले से ही कानूनी रोक लगी हुई है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया.
निष्कर्ष
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका मज़दूरी के नियमों और सप्लाई चेन में पारदर्शिता को लेकर व्यापारिक उपायों को बढ़ा रहा है. यदि ये उपाय लागू होते हैं, तो इसका असर भारत और चीन समेत पूरे एशिया के निर्यातकों पर पड़ सकता है.