अमेरिका का नया नौसैनिक अभियान: USS जॉर्ज वॉशिंगटन की मिडिल ईस्ट में तैनाती
अमेरिका की नौसैनिक ताकत में इजाफा
नई दिल्ली: अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने नौसैनिक बलों को मजबूत करने की योजना बनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है, जहां यह यूएसएस अब्राहम लिंकन की जगह ले सकता है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव पहले से निर्धारित नौसैनिक रोटेशन का हिस्सा है और इसका लिंकन की स्थिति से कोई सीधा संबंध नहीं है।
यूएसएस लिंकन की लंबी तैनाती
यूएसएस अब्राहम लिंकन, जिसमें लगभग 5,000 नाविक और मरीन शामिल हैं, काफी समय से समुद्र में तैनात है। यह जहाज 21 नवंबर को सैन डिएगो से निकला था और प्रारंभ में इसका मिशन प्रशांत क्षेत्र में था। बाद में, ईरान के साथ तनाव के कारण इसे मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ दिया गया।
कानून निर्माताओं और परिवारों के अनुसार, जहाज ने लंबे समय से किसी बंदरगाह पर ठहराव नहीं किया है, जिससे चालक दल में थकान और मानसिक दबाव की चिंताएं बढ़ गई हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता
कुछ परिवारों और सांसदों ने जहाज पर तैनात जवानों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ नाविकों ने जहाज से समुद्र में कूदने की कोशिश की। एक मामले में, एक साथी चालक दल के सदस्य ने एक नाविक को रोकने का प्रयास किया।
परिजनों ने सैन्य अधिकारियों के सामने लंबे मिशन, घर लौटने की अनिश्चितता और जहाज पर सुविधाओं की कमी के बारे में शिकायतें की हैं। कुछ सांसदों को पानी, प्लंबिंग, मेल सेवा, भोजन और आवश्यक सामान की उपलब्धता से संबंधित समस्याओं की जानकारी मिली है।
अमेरिकी नौसेना का स्पष्टीकरण
अमेरिकी नौसेना ने USS Lincoln पर मानसिक स्वास्थ्य संकट की बढ़ती रिपोर्टों को खारिज किया है। नौसेना का कहना है कि आत्महत्या के विचारों या प्रयासों में कोई असामान्य वृद्धि नहीं देखी गई है। अधिकारियों के अनुसार, जवानों को काउंसलर और चैपलिन जैसी सहायता उपलब्ध है।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी जहाज की स्थिति से संबंधित रिपोर्टों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया बताया है। हालांकि, नौसेना ने स्वीकार किया है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भोजन, स्वच्छता सामग्री और डाक में देरी हुई है।
यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन की तैनाती
यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन हाल ही में वियतनाम से रवाना हुआ है और सिंगापुर स्ट्रेट तथा मलक्का स्ट्रेट से होते हुए हिंद महासागर की ओर बढ़ रहा है। अब इसका स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे ईरान के साथ तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है।