अमेरिका का होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बड़ा सुरक्षा ऑपरेशन, ईरान पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी सेना का बड़ा ऑपरेशन
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा ऑपरेशन का संचालन किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन के तहत लगभग 1.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल ले जा रहे 40 वाणिज्यिक जहाज़ों को सुरक्षित रूप से निकाला गया। यह ऑपरेशन युद्ध की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ा माना जा रहा है। पिछले छह महीनों में जारी संघर्ष से पहले, इस जलमार्ग से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता था।
सुरक्षा उपायों का विस्तार
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को किए गए इस ऑपरेशन में अमेरिका ने हवा, समुद्र और अंतरिक्ष-आधारित साधनों का उपयोग किया। इसके साथ ही, ड्रोन हमलों के माध्यम से जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई और ईरान की वाणिज्यिक जहाज़ों को निशाना बनाने की क्षमता को कम करने के लिए हमले भी जारी रहे।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति
एक अधिकारी ने बताया कि इस एस्कॉर्ट ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलों को भी नाकाम किया। यह ऑपरेशन उस समय हुआ है जब ट्रंप प्रशासन ने अपनी युद्ध रणनीति का ध्यान होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर केंद्रित किया है। इसमें ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले करना और वाणिज्यिक जहाज़ों को सुरक्षा प्रदान करना शामिल है। अधिकारियों ने इसे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए "फुल कोर्ट प्रेस" का नाम दिया है।
संघर्ष का समाधान
हालांकि ऑपरेशन सफल रहा, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस संघर्ष का समाधान जल्द होने की संभावना कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा कंपनियाँ अब भी इस जलमार्ग से गुजरने को जोखिम भरा मानती हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर रही हैं। ऊर्जा की कीमतें ऊँची बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक बॉन्ड बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है।
ट्रंप का नया रुख
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को ज़मीन के नीचे ही रहने देने और सैटेलाइट तस्वीरों के ज़रिए उस पर नज़र रखने को तैयार हैं। पिछले साल ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमलों के दौरान यह सामग्री पूरी तरह नष्ट नहीं हुई थी।
सैन्य अभियान की विस्तार
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने अपनी मौजूदा रणनीति के तहत कई मोर्चों पर एक साथ सैन्य अभियान चलाया। इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आस-पास लगभग 60 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए और वाणिज्यिक जहाज़ों को सुरक्षित निकाला गया।
आगे की रणनीति
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सेना इस जलडमरूमध्य के पास आक्रामक अभियान जारी रखेगी, क्योंकि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से बनाने की क्षमता दिखाई है। एक अधिकारी ने इस अभियान की तुलना "घास काटने" या "व्हैक-ए-मोल" गेम से की।
ट्रंप का बयान
बुधवार को ओवल ऑफिस से बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के हालिया हमलों में सिर्फ ईरानी रडार सिस्टम को ही निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि इसका मकसद तेहरान की उस क्षमता को कम करना भी था जिससे वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नज़र रखता है। ट्रंप ने कहा, "वे जहाजों को देखने की कोशिश कर रहे थे। वे उन्हें नहीं देख सकते क्योंकि उनके पास रडार नहीं है।"
जलमार्ग का महत्व
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक शिपिंग रूट में से एक बना हुआ है। इस जलमार्ग के आस-पास लगातार हो रहे सैन्य टकराव ने वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इस संघर्ष के व्यापक असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।