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अमेरिका की चुप्पी: सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती तनाव की कहानी

पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष में अमेरिका की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में हुई एक गुप्त बैठक में अमेरिका ने हूतियों से समझौता किया है, जिससे सऊदी अरब को अकेला छोड़ दिया गया है। इस स्थिति का क्या असर होगा, यह जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

सऊदी अरब की मुश्किलें और अमेरिका की भूमिका


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच चल रही लड़ाई में अमेरिका की भूमिका ने कई लोगों को चौंका दिया है। जो देश पहले सऊदी अरब का मित्र माना जाता था, वह अब किनारे पर खड़ा दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब पर संकटों का पहाड़ टूट पड़ा है। पहले ईरान-अमेरिका संघर्ष में उसे नुकसान उठाना पड़ा, और अब ईरान समर्थित हूती भी सक्रिय हो गए हैं। लड़ाई की लपटें मक्का के निकट तक पहुंच गई हैं, लेकिन अमेरिका मदद करने के बजाय दूर खड़ा है।


अमेरिका और हूतियों के बीच गुप्त वार्ता

हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान में एक गुप्त बैठक हुई। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, यह मुलाकात मस्कट में आयोजित की गई। अमेरिका की ओर से दूतावास के अधिकारी शामिल थे, जबकि हूती पक्ष का नेतृत्व मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्दुलमलिक अल-अजरी कर रहे थे। इस बैठक में हूतियों ने आश्वासन दिया कि वे अमेरिकी या इजराइली जहाजों और अन्य व्यापारिक पोतों पर हमला नहीं करेंगे, केवल सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाएंगे। इसके बाद अमेरिका ने सऊदी अरब का समर्थन न करने का निर्णय लिया।


मक्का में युद्ध की लपटें

सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। हूतियों ने लाल सागर के आसपास कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है। सऊदी सेना का दावा है कि उन्होंने मक्का शहर के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को नष्ट कर दिया। यह पहली बार है जब मक्का में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए। हालांकि, हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। इस स्थिति में सऊदी अरब खुद को अकेला महसूस कर रहा है, जबकि अमेरिका ने हूतियों के साथ समझौता कर लिया है और अपने पुराने मित्र को संकट में छोड़ दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या घटनाक्रम unfolds होता है।