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अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में ड्रोन और मिसाइलों का बड़ा नुकसान

ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका को अपने महत्वपूर्ण MQ-9 रीपर ड्रोन में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब तक 45 ड्रोन गिर चुके हैं, जिससे 1.3 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अमेरिका ने होर्मुज के पास ड्रोन का अधिकतम उपयोग किया है, लेकिन तकनीकी समस्याओं और दुश्मन की फायरिंग के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। इसके अलावा, अमेरिका को मिसाइलों के भंडार को भरने के लिए 67 अरब डॉलर का अतिरिक्त बजट चाहिए। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक।
 

अमेरिका के ड्रोन बेड़े को हुआ भारी नुकसान


नई दिल्ली: ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका को अपने महत्वपूर्ण ड्रोन, जो हवाई निगरानी और हमलों के लिए उपयोग होते हैं, में भारी क्षति का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम 45 MQ-9 रीपर ड्रोन या तो गिर चुके हैं या दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं। यह संख्या अमेरिका के कुल रीपर बेड़े का लगभग 25 प्रतिशत है।


1.3 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान

एक MQ-9 रीपर की कीमत, जिसमें सेंसर और हथियार शामिल हैं, 30 से 50 मिलियन डॉलर के बीच होती है। इस प्रकार, 45 ड्रोन के नुकसान का कुल मूल्य 1.3 अरब डॉलर से अधिक है। सभी ड्रोन दुश्मन की फायरिंग के कारण नहीं गिरे; कुछ ड्रोन ऑपरेटर से संपर्क टूटने के कारण खुद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गए। युद्ध के दौरान अमेरिका को ड्रोन संचालन में तकनीकी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा है।


होर्मुज के पास ड्रोन का अधिकतम उपयोग

अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास रीपर ड्रोन का सबसे अधिक उपयोग किया है। यह समुद्री मार्ग तेल और व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और ईरान-अमेरिका तनाव का केंद्र बना हुआ है।


रीपर ड्रोन लंबे समय तक हवा में रहकर निगरानी कर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर हमला भी कर सकता है। हालांकि, इसकी गति कम है और यह कई बार नीची ऊंचाई पर उड़ता है, जिससे ईरान की सेना और यमन व इराक में ईरान समर्थित समूहों के लिए इसे निशाना बनाना आसान हो जाता है।


रीपर ड्रोन की संख्या में कमी

युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास लगभग 185 रीपर ड्रोन थे, जिनमें से 165 एयर फोर्स और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। मरीन कॉर्प्स ने कहा है कि उनका एक भी ड्रोन नहीं गिरा।


मई में एयर फोर्स के लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने सीनेट को बताया था कि अब केवल 135 रीपर ही बचे हैं। लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए अमेरिका अब धीरे-धीरे पुराने रीपर को हटाकर सस्ते, हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना बना रहा है, जो झुंड में काम कर सकेंगे।


मिसाइलों का भंडार खतरे में

ईरान युद्ध में अमेरिका ने मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग किया है। पहले महीने में ही 850 से अधिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल और 1000 से अधिक पैट्रियट व THAAD मिसाइलें इस्तेमाल की जा चुकी हैं।


THAAD दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए प्रयोग की जाती है। अमेरिका साल में केवल 96 THAAD इंटरसेप्टर बना पाता है, लेकिन अगले साल 857 और 5 साल में 2600 इंटरसेप्टर की आवश्यकता बताई जा रही है।


67 अरब डॉलर की मांग, भंडार भरना चुनौती

युद्ध के खर्च और हथियारों की भरपाई के लिए अमेरिकी सरकार कांग्रेस से 67 अरब डॉलर का अतिरिक्त बजट मांग रही है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार, सितंबर तक खर्च 37.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।


यूक्रेन को दिए गए हथियारों ने भी अमेरिकी भंडार पर दबाव बढ़ाया है। अब सवाल यह है कि ड्रोन और मिसाइलों को फिर से कितनी जल्दी तैयार किया जाएगा। नए हथियारों के निर्माण में समय लगेगा, जिससे अमेरिका के सामने युद्ध खर्च और स्टॉक रीफिल, दोनों की चुनौती है।