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अमेरिका-चीन शिखर वार्ता में तनाव और विवादों का सामना

हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता ने दोनों देशों के बीच के तनाव को फिर से उजागर किया। इस बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, मीडिया नियंत्रण और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर कई विवाद उत्पन्न हुए। अमेरिकी पत्रकारों को भी कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव को एक बार फिर से चर्चा का विषय बना दिया है।
 

अमेरिका और चीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता

हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के बीच के तनाव को एक बार फिर से उजागर किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो दिवसीय शिखर वार्ता के दौरान सुरक्षा, मीडिया नियंत्रण और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर कई बार टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।


सुरक्षा व्यवस्था में सख्ती

बीजिंग में आयोजित इस बैठक के दौरान चीनी अधिकारियों ने सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए थे। इस दौरान अमेरिकी और चीनी मीडिया कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की एक घटना भी हुई। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक के दौरान चीनी पत्रकारों का एक समूह अचानक बैठक स्थल की ओर बढ़ा, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस घटना में व्हाइट हाउस के एक अधिकारी को धक्का लगने से चोट आई।


चीनी मीडिया के व्यवहार पर नाराजगी

इस घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने चीनी मीडिया दल के आक्रामक व्यवहार पर नाराजगी जताई।


टेंपल ऑफ हेवन में विवाद

बैठक के दौरान एक और बड़ा विवाद तब उत्पन्न हुआ जब बीजिंग के टेंपल ऑफ हेवन में अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के एक एजेंट को प्रवेश से रोक दिया गया। चीनी अधिकारियों ने कहा कि एजेंट अपने साथ हथियार नहीं ले जा सकते, जबकि अमेरिकी सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम के पास हथियार होना आवश्यक है।


अमेरिकी पत्रकारों पर प्रतिबंध

अमेरिकी पत्रकारों को भी कई प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। रिपोर्टों में कहा गया कि उनकी आवाजाही सीमित कर दी गई थी, और पानी की बोतलें भी जब्त कर ली गईं।


साइबर सुरक्षा पर सतर्कता

पूरे दौरे के दौरान अमेरिकी पक्ष साइबर जासूसी और हैकिंग के प्रति सतर्क रहा। रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने अपने प्रतिनिधियों और पत्रकारों को अस्थायी मोबाइल फोन और अलग ईमेल खातों का उपयोग करने की सलाह दी।


निगरानी और सुरक्षा

बीजिंग में सुरक्षा एजेंसियों ने गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जगह-जगह निगरानी कैमरे लगाए थे। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव और भरोसे की कमी को फिर से चर्चा का विषय बना दिया है।