×

अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए तीसरे विमानवाहक पोत की तैनाती की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश विमानवाहक पोत की तैनाती की घोषणा की है। यह पोत हिंद महासागर में पहुंच चुका है और ईरान के समुद्री रास्तों की निगरानी करेगा। ट्रंप का कहना है कि यह नाकाबंदी ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए है, जबकि ईरान ने अमेरिका की मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। जानें इस स्थिति के पीछे की रणनीति और अमेरिका की सैन्य तैयारियों के बारे में।
 

USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की तैनाती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ "पूर्ण सैन्य वर्चस्व" का दावा करते हुए क्षेत्र में तीसरे विमानवाहक पोत की तैनाती की पुष्टि की है। USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN 77) अब हिंद महासागर और मध्य-पूर्व के महत्वपूर्ण जलक्षेत्र में पहुंच चुका है, जिससे ईरान पर दबाव बढ़ गया है।


अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह विशालकाय पोत 23 अप्रैल को अफ्रीका के पूर्वी तट से गुजरते हुए हिंद महासागर में दाखिल हुआ।


सैन्य शक्ति: इस पोत पर कई आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और हजारों सैन्यकर्मी तैनात हैं।


त्रिकोणीय घेराबंदी: यह पोत पहले से तैनात USS जेराल्ड आर. फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन के साथ मिलकर ईरान के समुद्री रास्तों की निगरानी करेगा।


रणनीतिक उद्देश्य: 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष-विराम के समय का उपयोग अमेरिकी सेना ने अपने हथियारों को फिर से लोड करने और जहाजों की स्थिति बदलने के लिए किया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर फिर से हमले शुरू किए जा सकें।


अमेरिकी सेंट्रल कमांड का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने X (पहले Twitter) पर एक बयान में कहा, "निमिट्ज़-श्रेणी का विमानवाहक पोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN 77) 23 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ज़िम्मेदारी वाले क्षेत्र में, हिंद महासागर में गश्त कर रहा है।" बयान में यह भी जोड़ा गया कि यह विमानवाहक पोत अफ्रीका के पूर्वी तट के पास से गुज़र रहा था।


ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी

हालांकि, इस क्षेत्र में बुश का आगमन अमेरिका द्वारा ईरान की नाकाबंदी को और मज़बूत करने की एक चाल के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप के अनुसार, इस नाकाबंदी का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करना और उसकी अर्थव्यवस्था पर इतना दबाव डालना है कि वह शांति समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो जाए। लेकिन ईरान ने अमेरिका की "मनमानी" मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है और इस नाकाबंदी को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है।


इसके बावजूद, ट्रंप ने दावा किया है कि यह नाकाबंदी "100 प्रतिशत असरदार" है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने के लिए उन पर "किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं" है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ईरान के साथ कोई भी समझौता तभी किया जाएगा, जब वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सर्वोत्तम हितों के अनुरूप होगा। "यह बहुत ही टॉप सीक्रेट है... हमने नाकेबंदी के साथ जो किया है, वह कमाल का है, और कोई भी इसे पार नहीं पाता। कोई भी इसे पार करना नहीं चाहता; कोई कोशिश भी नहीं कर रहा... हमारा इस पर पूरा नियंत्रण है... ईरान ने सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और अन्य कई जगहों पर हमला किया—किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी," अमेरिकी राष्ट्रपति ने गुरुवार को वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा।