अमेरिका में बर्थ टूरिज्म पर ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख: मार्को रुबियो का बयान
बर्थ टूरिज्म पर सख्त कदम
नई दिल्ली: अमेरिका में बर्थ टूरिज्म के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन ने एक सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नागरिकता किसी भी प्रकार के व्यापारिक सौदे का हिस्सा नहीं हो सकती। इस संदर्भ में, सरकार ने बर्थ टूरिज्म से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पिछले एक महीने में 600 से अधिक वीजा रद्द किए हैं।
बर्थ टूरिज्म प्रिवेंशन टास्क फोर्स का गठन
विदेश विभाग ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और अन्य एजेंसियों के सहयोग से बर्थ टूरिज्म प्रिवेंशन टास्क फोर्स का गठन किया है। इसका उद्देश्य उन नेटवर्क पर कार्रवाई करना है, जो विदेशी नागरिकों को अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के लिए वीजा प्राप्त करने में सहायता करते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों, गलत जानकारी और वीजा प्रक्रिया की कथित कोचिंग का सहारा लिया जाता है। यह टास्क फोर्स वीजा धारकों की गतिविधियों और यात्रा की जांच कर रही है।
गोल्ड कार्ड पर उठे सवाल
रुबियो के 'नागरिकता बिकाऊ नहीं' वाले बयान के बाद, सोशल मीडिया पर ट्रंप प्रशासन के गोल्ड कार्ड कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों ने यह पूछा है कि यदि नागरिकता को पैसे के बदले प्राप्त करने का कोई रास्ता नहीं होना चाहिए, तो निवेश के आधार पर अमेरिका में रहने का विकल्प कैसे उचित है।
हालांकि, गोल्ड कार्ड को सीधे नागरिकता बेचने की योजना कहना गलत है। इसके अंतर्गत, बड़ी राशि का योगदान करने वाले विदेशी नागरिकों के लिए अमेरिका में स्थायी निवास और बाद में नागरिकता प्राप्त करने का कानूनी मार्ग प्रदान किया गया है।
बर्थ टूरिज्म की परिभाषा
बर्थ टूरिज्म का तात्पर्य उन विदेशी नागरिकों से है, जो अमेरिका में अपने बच्चे को जन्म देने और बच्चे के लिए अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने के उद्देश्य से जाते हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस प्रथा को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए हैं।
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन, जिसे 1868 में स्वीकृति मिली थी, अमेरिका में जन्म लेने वाले व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित एक महत्वपूर्ण संवैधानिक आधार है। इसी प्रावधान के तहत बर्थ टूरिज्म पर लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस चलती रही है। रुबियो के हालिया बयान और वीजा रद्द करने की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर भविष्य में और भी सख्त कदम उठा सकता है।