अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए नई चुनौतियाँ: 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड निलंबन
महत्वपूर्ण जानकारी
नई दिल्ली: अमेरिका में कार्यरत भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित नियमों को सख्त करते हुए आठ प्रमुख टेक कंपनियों को ग्रीन कार्ड से जुड़े PERM कार्यक्रम से निलंबित करने का निर्णय लिया है। इनमें इंफोसिस, टाटा, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। इस निर्णय से अमेरिका में स्थायी निवास की तैयारी कर रहे विदेशी कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
कौन सी कंपनियाँ प्रभावित हुईं?
अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं। श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारियों के साथ इस घोषणा की।
प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियाँ विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए वीजा कार्यक्रमों का दुरुपयोग कर रही हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
अमेरिकी सरकार के आरोप
श्रम सचिव के अनुसार, 2009 से इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए हैं। इनमें से 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा स्वीकृत हुए और एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणपत्र जारी किए गए। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी ने अमेरिका में लगभग 6,000 कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि विदेशी कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का लाभ उठाया। प्रशासन ने इसी आधार पर कंपनी की भर्ती नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
PERM प्रोग्राम का महत्व
PERM अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है। इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या कार्य स्थितियों पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। निलंबन के बाद संबंधित कंपनियों के नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इससे उन कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है, जो इन कंपनियों के माध्यम से स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में हैं।
भारतीय आईटी पेशेवरों की चिंताएँ
भारतीय आईटी कंपनियों का अमेरिका में बड़ा कारोबार है। इस निर्णय से ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे भारतीय कर्मचारियों के सामने अनिश्चितता बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के OPT कार्यक्रम के लिए नई फीस का प्रस्ताव रखा है, जिसमें प्रारंभिक OPT भागीदारी के लिए 70,000 डॉलर और बाद की सिफारिश पर 30,000 डॉलर की फीस शामिल है। यह अभी एक प्रस्ताव है, लागू शुल्क नहीं।