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अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की स्थिति: ट्रंप के फैसले और बदलती राजनीति

अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की स्थिति पर ट्रंप के निर्णयों का गहरा प्रभाव पड़ा है। हाल के वर्षों में, भारतीय अमेरिकियों का झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी से रिपब्लिकन पार्टी की ओर बढ़ा है। इस लेख में, हम ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भारतीय अमेरिकियों की चिंताओं और उनके राजनीतिक रुख में बदलाव पर चर्चा करेंगे। क्या वे ट्रंप के साथ रहेंगे या उनके निर्णयों के कारण दूर होते जाएंगे? जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर।
 

अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों में भारतीयों की भूमिका

भारत के प्रतिभाशाली पेशेवरों की आवश्यकता अमेरिका की तकनीकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है। हालाँकि, अब इस मुद्दे पर अमेरिका में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है कि विदेशी श्रमिकों को कितनी छूट दी जानी चाहिए। अक्टूबर 2026 में, अमेरिका के उपाध्यक्ष जेडी वैंस ने एच1 बी वर्कर्स को 'फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स' कहा, जो यह दर्शाता है कि ये विदेशी कर्मचारी अपनी नौकरी के कारण कंपनियों के प्रति बंधे रहते हैं। अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी निवेश कर रहा है, जिससे मशीनों के माध्यम से अधिक कार्य किए जा सकें, जिसमें वे कार्य भी शामिल हैं जो वर्तमान में भारतीय पेशेवर कर रहे हैं।


भारतीय अमेरिकियों का राजनीतिक झुकाव

हाल के वर्षों में, कुछ भारतीय अमेरिकियों ने डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की ओर रुख किया है। कुछ को उनके व्यापार नीतियाँ पसंद हैं, जबकि अन्य पारिवारिक मूल्यों पर उनके जोर को सराहते हैं। हालांकि, जब ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति पद संभाला, तो उनके वीजा और आर्थिक नीतियों ने कई भारतीय अमेरिकियों को दुविधा में डाल दिया। 3 नवंबर को अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या भारतीय अमेरिकियों का ट्रंप के प्रति समर्थन बना रहेगा या वे उनके निर्णयों के कारण दूर होते जा रहे हैं।


डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन और बदलाव

अधिकतर भारतीय अमेरिकियों ने वर्षों से डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन किया है, जो ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की प्रतिकूल है। लेकिन अब इस समर्थन में बदलाव आ रहा है। कार्निके के 2026 के सर्वेक्षण के अनुसार, 2020 में 52% भारतीय अमेरिकियों का झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर था, जो अब घटकर 46% रह गया है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ने वालों का प्रतिशत 15% से बढ़कर 19% हो गया है।


ट्रंप की नीतियों का प्रभाव

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में, उनकी नीतियों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। जनवरी 2025 में ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद, उनकी सरकार ने इमीग्रेशन और व्यापार से संबंधित कठोर निर्णय लिए। एच1 वीजा, जो कि भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण है, पर शुल्क बढ़ा दिया गया। कार्निके के अनुसार, 2024 में एच1 बी आवेदनों में भारतीयों की हिस्सेदारी 71% थी।


भारतीय अमेरिकियों की चिंताएँ

भारतीय अमेरिकियों की नाराजगी केवल वीजा तक सीमित नहीं है। सर्वेक्षण में 64% भारतीय अमेरिकियों ने ट्रंप की इमीग्रेशन नीतियों का विरोध किया। इसके अलावा, 68% लोग उनकी आर्थिक नीतियों से असंतुष्ट थे। ट्रंप सरकार ने 2025 में भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ बढ़ा दिए, जिससे भारतीय अमेरिकियों की स्थिति और भी जटिल हो गई।