×

अमेरिकी नौसेना के USS लिंकन पर तैनात सैनिकों की स्थिति गंभीर, क्या है कारण?

अमेरिकी नौसेना के USS लिंकन पर तैनात सैनिकों की स्थिति गंभीर होती जा रही है। लंबे समय से समुद्र में तैनात इन सैनिकों को मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, बुनियादी सुविधाओं की कमी और अनिश्चित वापसी की तारीख ने तनाव को बढ़ा दिया है। जानें इस स्थिति के पीछे की असली वजहें और क्या हो रहा है USS लिंकन पर।
 

चीन के रणनीतिकार की चेतावनी का असर


नई दिल्ली: चीन के प्रसिद्ध सैन्य रणनीतिकार सुन जू ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'द आर्ट ऑफ वार' में यह स्पष्ट किया था कि किसी भी सेना की लंबे समय तक मोर्चे पर तैनाती देश के संसाधनों को कमजोर कर देती है और सैनिकों के मनोबल को गिरा देती है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे अनिर्णीत सैन्य टकराव के कारण अमेरिकी नौसेना को इसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध को छह महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कूटनीतिक या सैन्य निर्णय न होने के कारण अमेरिकी रक्षा बलों पर अनिश्चितकालीन तैनाती का भारी दबाव है। अमेरिकी नौसेना के प्रमुख युद्धपोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' पर तैनात हजारों सैनिकों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को लेकर अब अमेरिका में गंभीर चिंताएं उठने लगी हैं।


वापसी की अनिश्चितता

वापसी की कोई तारीख नहीं


नौसेना प्रशासन ने संकेत दिया है कि मध्य पूर्व में यूएसएस लिंकन की जगह 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को भेजने की योजना है, लेकिन लिंकन की स्वदेश वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।


नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि 'ऑपरेशनल सिक्योरिटी' के कारण वापसी का समय सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इस अनिश्चितता ने सैनिकों और उनके परिवारों के बीच तनाव और असंतोष को और बढ़ा दिया है।


लंबी तैनाती का रिकॉर्ड

208 दिन लगातार समंदर में बीतने का रिकॉर्ड


सैन डिएगो से 21 नवंबर को रवाना हुआ यूएसएस लिंकन युद्धपोत अब तक 259 दिनों की लंबी तैनाती पूरी कर चुका है। इस कठिन मिशन के दौरान यह विशालकाय जहाज केवल दो बार किसी बंदरगाह पर रुका, जिसमें सात जुलाई को ओमान में की गई एक संक्षिप्त यात्रा भी शामिल है।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस युद्धपोत पर तैनात लगभग 5,000 नाविकों और मरीन सैनिकों ने लगातार 208 दिन बिना ज़मीन पर कदम रखे केवल समंदर के बीच बिताए हैं। इतने लंबे समय तक बिना किसी मानवीय ब्रेक के उथल-पुथल भरे समुद्री माहौल में रहने के कारण सैनिकों का मानसिक संतुलन और शारीरिक क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।


बुनियादी सुविधाओं की कमी

टूटे शौचालय और दूषित पानी


तुर्की की आधिकारिक संवाद एजेंसी 'अनादोलू' की रिपोर्ट के अनुसार, नौसेना के कार्यवाहक सचिव हुंग काओ से सैन डिएगो में लगभग 200 पीड़ित परिवारों ने मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया। आमतौर पर सैन्य नियमों के तहत सार्वजनिक मंचों से दूर रहने वाले परिवारों ने अब स्थिति पर सवाल उठाए हैं। परिजनों ने बताया कि जहाज पर मूलभूत सुविधाओं की कमी है। टूटे हुए शौचालय, पीने के पानी में गंदगी की आशंका, शावर क्षेत्र में फफूंद और वेंटिलेशन की गंभीर समस्याओं से सैनिक जूझ रहे हैं। इसके साथ ही, सप्लाई चेन बाधित होने के कारण ताजे खाने-पीने की चीजें, व्यक्तिगत स्वच्छता उत्पाद और परिजनों की चिट्ठियां समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। नौसेना के वरिष्ठ वाइस एडमिरल डगलस वेरिसिमो ने भी माना कि बहरीन के रास्ते होने वाली आपूर्ति श्रृंखला में भारी बैकलॉग बनने से हालात काफी बिगड़ गए थे।