अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी जहाज को डुबाने की घटना पर नई जानकारी
अमेरिकी पनडुब्बी का हमला
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में अमेरिका ने दावा किया है कि हिंद महासागर में उसकी पनडुब्बी ने एक ईरानी जहाज को डुबो दिया, जो अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में सुरक्षित महसूस कर रहा था। इस जहाज को एक टॉर्पिडो द्वारा निशाना बनाया गया। यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी दुश्मन जहाज को टॉरपिडो से डुबाने की पहली बार है। अमेरिका ने जिस जहाज का उल्लेख किया है, उसका नाम आईआरआईएस देना है, जिसे श्रीलंका के निकट भारतीय महासागर में डुबोया गया। यह ईरानी जहाज भारत से लौट रहा था और मिलन इंटरनेशनल फ्रीट रिव्यू 2026 में भाग लेने के लिए भारत आया था।
घटना का विवरण
17 फरवरी को विशाखापटनम पोर्ट पर भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसैनिक कमान ने इस जहाज का स्वागत किया था। कार्यक्रम के बाद, यह जहाज भारतीय महासागर से ईरान की ओर लौट रहा था, जब 4 मार्च को अमेरिका ने उस पर हमला कर दिया। इस हमले में लगभग 87 लोगों की जान गई। बताया गया है कि जहाज पर ईरानी नौसेना से जुड़े करीब 180 लोग सवार थे। हमले के समय जहाज पर सवार लोगों ने आपातकालीन कॉल भी की थी।
सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन
श्रीलंका की नौसेना ने मदद के लिए तुरंत कार्रवाई की और लगभग 32 लोगों को बचाया। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार, 87 लोग मारे गए हैं और कई अन्य अभी भी लापता हैं। जहाज के डूबने की सूचना सबसे पहले श्रीलंका ने दी थी, जिसके बाद अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने हमले की जानकारी साझा की।
वीडियो सबूत
अमेरिका ने अपने दावे को समर्थन देने के लिए एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें एक जहाज पर हमला होते हुए दिखाया गया है। इससे पहले, श्रीलंकाई नौसेना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनका मुख्य ध्यान जहाज पर सवार लोगों को बचाना था।
बचाव कार्य की स्थिति
अब तक 32 ईरानी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है और उन्हें करापीतिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बचाव कार्य के दौरान कई शव भी समुद्र में तैरते हुए मिले हैं, जो संभवतः जहाज के क्रू मेंबर हैं। हालांकि, लापता लोगों की सही संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस घटना पर भारत या ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।