अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रंप के टेरिफ पर असर
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टेरिफ पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाने जा रहा है, जिसका प्रभाव न केवल अमेरिका, बल्कि भारत और चीन जैसे देशों पर भी पड़ेगा। यदि कोर्ट ने टेरिफ को अवैध करार दिया, तो अमेरिका को 130 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि लौटानी पड़ सकती है। यह फैसला वैश्विक व्यापार की दिशा को भी प्रभावित करेगा। जानें इस फैसले के संभावित परिणाम और ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में।
Jan 16, 2026, 16:12 IST
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट एक महत्वपूर्ण निर्णय की ओर बढ़ रहा है, जिसका प्रभाव न केवल डोनाल्ड ट्रंप की सरकार पर पड़ेगा, बल्कि भारत समेत कई देशों पर भी इसका असर होगा। यह मामला टेरिफ से संबंधित है। आज, सुप्रीम कोर्ट ट्रंप द्वारा लगाए गए टेरिफ पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाला है। यह तय किया जाएगा कि क्या राष्ट्रपति ने नेशनल इमरजेंसी कानून का उपयोग करके टेरिफ लगाकर अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन किया है। यदि कोर्ट ने टेरिफ को अवैध करार दिया, तो अमेरिका को 130 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि लौटाने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। नौ जस्टिस में से केवल तीन जस्टिस ट्रंप के खुले समर्थक माने जाते हैं, जबकि अन्य ने पहले ही टेरिफ को कानूनी रूप से कमजोर मानने के संकेत दिए हैं।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
इस निर्णय का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह चीन से लेकर भारत तक वैश्विक व्यापार की दिशा को प्रभावित करेगा। वाशिंगटन की अदालत के बाहर आज जितनी हलचल है, उतनी ही बेचैनी वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाजारों में भी देखी जा रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के सबसे विवादास्पद निर्णयों में से एक पर अंतिम मुहर लगाने जा रहा है। सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऐसे टेरिफ लगाए हैं, जिनकी अनुमति कानून नहीं देता। ट्रंप ने इस फैसले को अपने लिए जीवन-मृत्यु का मामला बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि कोर्ट उनके खिलाफ फैसला सुनाता है, तो अमेरिका वित्तीय अराजकता में फंस सकता है। कानूनी विशेषज्ञों और व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि टेरिफ के खिलाफ फैसला आने की संभावना अधिक है। यही कारण है कि आज का दिन वैश्विक व्यापार की दिशा को बदल सकता है।
ट्रंप का टेरिफ लगाने का आधार
ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट का सहारा लेकर नेशनल इमरजेंसी घोषित की और चीन पर भारी ड्यूटी के साथ यूनिवर्सल टेरिफ लागू किया। कुल वसूली 130 बिलियन डॉलर से अधिक मानी जाती है। निचली अदालतों ने पहले ही कहा है कि यह कानून इतने व्यापक टेरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि ट्रंप ने अपनी शक्ति का सही उपयोग किया या सीमा पार की। ट्रंप का कहना है कि यदि टेरिफ अवैध घोषित होते हैं, तो सरकार को सैकड़ों बिलियन डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी राशि लौटाना अमेरिका की वित्तीय स्थिति को हिला सकता है। इसी डर के चलते उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामला बताया और कोर्ट पर दबाव भी बनाया।