अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रंप के टैरिफ को किया असंवैधानिक घोषित
महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय
नई दिल्ली : अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक कार्यक्रम पर एक महत्वपूर्ण कानूनी रोक लगाई है। शुक्रवार को दिए गए एक ऐतिहासिक निर्णय में, अदालत ने ट्रंप द्वारा विदेशी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए टैरिफ को पूरी तरह से अवैध करार दिया। 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से कर नीति लागू नहीं कर सकते। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है।
6-3 का निर्णायक फैसला
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में बेंच ने निचली अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति का यह कदम उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत के छह न्यायाधीशों ने माना कि 1977 के कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क अवैध और असंवैधानिक थे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राष्ट्रपति को अपनी असाधारण शक्तियों के दावों को सही साबित करने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेनी होगी।
संवैधानिक शक्तियों का टकराव
निर्णय के दौरान न्यायाधीशों के बीच इस बात पर सहमति थी कि अमेरिका का संविधान टैक्स और शुल्क लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस को ही देता है। मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स ने अपने लेख में कहा कि संवैधानिक निर्माताओं ने टैरिफ लगाने की शक्ति किसी भी कार्यकारी शाखा या राष्ट्रपति को नहीं सौंपी थी। यह व्यवस्था लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने के लिए की गई है ताकि कोई भी व्यक्ति देश की आर्थिक नीतियों पर पूर्ण नियंत्रण न कर सके।
आर्थिक एजेंडे को बड़ा नुकसान
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय ट्रंप के आर्थिक ब्लूप्रिंट के लिए एक बड़ा झटका है, जिसे वे अपने कार्यकाल का मुख्य आधार मानते थे। व्यापारिक भागीदारों पर शुल्क लगाकर घरेलू अर्थव्यवस्था को लाभ पहुँचाने की उनकी नीति अब कानूनी पचड़े में फंस गई है। यह पहला बड़ा मामला है जो ट्रंप के नीतिगत एजेंडे से जुड़ा था और सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। इस फैसले से उनके भविष्य के व्यापारिक समझौतों की ताकत काफी कम हो गई है।
न्यायाधीशों के बीच वैचारिक मतभेद
हालांकि यह फैसला बहुमत से आया, लेकिन बेंच के तीन कंजर्वेटिव न्यायाधीशों ने इससे असहमति जताई है। जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावनॉ का मत मुख्य न्यायाधीश से भिन्न था। जस्टिस कावनॉ ने अपनी असहमति में कहा कि विवादित शुल्क नीति भले ही आर्थिक रूप से समझदारी भरी न लगे, लेकिन कानूनी इतिहास के आधार पर राष्ट्रपति के पास ऐसा करने का अधिकार है।
वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव
अदालत के इस निर्णय का प्रभाव केवल अमेरिका में ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापारिक संबंधों पर भी पड़ेगा। अब ट्रंप प्रशासन बिना किसी विधायी प्रक्रिया के किसी भी देश पर अचानक टैरिफ नहीं लगा सकेगा। इससे अमेरिका के सभी प्रमुख व्यापारिक भागीदारों को राहत मिली है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता की उम्मीद बढ़ गई है। अब राष्ट्रपति को अपनी व्यापारिक नीतियों को लागू करने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना होगा, जो उनके लिए एक बड़ी चुनौती है।