अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ नीति पर फैसला टाला, वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा असर
सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ मामले पर निर्णय नहीं दिया
नई दिल्ली: अमेरिका की सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू की गई वैश्विक टैरिफ नीति की वैधता पर महत्वपूर्ण निर्णय को फिलहाल टाल दिया है। मंगलवार को अदालत ने कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय सुनाए, लेकिन ट्रंप की टैरिफ नीति से संबंधित इस बहुप्रतीक्षित मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं आया। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस मामले में कानूनी अनिश्चितता बनी रहेगी।
अगली सुनवाई की तारीख का निर्धारण नहीं
सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर अपने निर्णयों की तारीख पहले से नहीं बताता, लेकिन इस बार न तो कोई निर्णय सुनाया गया और न ही अगली सुनवाई की तारीख का उल्लेख किया गया। यह संकेत करता है कि न्यायाधीश इस संवेदनशील मामले पर और विचार करना चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अदालत ने तीन अन्य मामलों में निर्णय दिए, लेकिन टैरिफ से संबंधित मामला फिर से टल गया।
पिछले फैसले की तरह फिर से टला मामला
यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर निर्णय टाला गया है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह ट्रंप की वैश्विक टैरिफ नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं दिया था। लगातार हो रही देरी ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिका की आर्थिक और व्यापार नीति से जुड़ा हुआ है।
कानूनी अधिकारों पर उठे सवाल
5 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान दिए गए तर्कों से यह स्पष्ट होता है कि अदालत के भीतर इस बात को लेकर गंभीर संदेह है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप के पास टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार था या नहीं। यह टैरिफ 1977 के एक कानून के तहत लगाए गए थे, जो आपातकालीन परिस्थितियों में राष्ट्रपति को विशेष शक्तियां देता है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ट्रंप ने इस कानून का दायरा बढ़ाकर उसका गलत इस्तेमाल किया, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक था।
आर्थिक नीति पर मंडराता सवाल
टैरिफ ट्रंप प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीतियों में से एक रहे हैं। इनका असर न केवल अमेरिका के भीतर उद्योगों और उपभोक्ताओं पर पड़ा, बल्कि वैश्विक व्यापार संबंधों पर भी इसका गहरा प्रभाव देखा गया। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय केवल कानूनी नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब और इंतजार क्यों?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थगन का मतलब है कि इस मामले का निपटारा होने में कम से कम एक और महीना लग सकता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह के अवकाश पर जाने की तैयारी कर रहा है। अदालत की सामान्य प्रक्रिया को देखते हुए, टैरिफ से जुड़े फैसले की अगली संभावित तारीख 20 फरवरी मानी जा रही है।
वैश्विक नजरें फैसले पर टिकीं
इस मामले पर केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के देश नजर बनाए हुए हैं। अगर कोर्ट यह तय करता है कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टैरिफ लगाए थे, तो इससे भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपतियों की आर्थिक शक्तियों पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं, अगर ट्रंप के फैसले को वैध ठहराया जाता है, तो यह राष्ट्रपति को आपातकालीन कानूनों के तहत और व्यापक अधिकार देने का रास्ता खोल सकता है।