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अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर बन रहे डैम का विरोध: क्या है चीन का बड़ा खतरा?

अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर बन रहे अपर बहुउद्देश्यीय प्रोजेक्ट का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध तेज हो गया है। उन्हें डर है कि इससे विस्थापन और पर्यावरण को नुकसान होगा। चीन के वैज्ञानिकों ने भी चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण ब्रह्मपुत्र में पानी का बहाव बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ेगा। जानें इस मुद्दे के पीछे की पूरी कहानी और भारत के लिए संभावित खतरे क्या हैं।
 

सियांग नदी पर डैम का विरोध


नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर चल रहे अपर बहुउद्देश्यीय प्रोजेक्ट (SUMP) के खिलाफ स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ता जा रहा है। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उन्हें चिंता है कि इस डैम के निर्माण से विस्थापन होगा, उनकी पुश्तैनी भूमि खो जाएगी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। सरकार इस परियोजना को तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल डैम के जवाब के रूप में देख रही है, लेकिन अब चीन के वैज्ञानिकों ने भी अपने डैम के संभावित खतरों के बारे में चेतावनी दी है।


चीनी वैज्ञानिकों की चेतावनी

8 अक्टूबर को प्रकाशित एक अध्ययन में, चाइना साइंस बुलेटिन में चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज और युन्नान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है। उन्होंने तिब्बती पठार के ट्री-रिंग डेटा का उपयोग करते हुए 1325 से 2020 तक ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव का इतिहास तैयार किया और जलवायु मॉडल के माध्यम से भविष्य का अनुमान लगाया। अध्ययन के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग के कारण नदी में पानी का बहाव तेजी से बढ़ेगा। मध्यम उत्सर्जन पर सालाना रन-ऑफ 20% और उच्च उत्सर्जन पर 29% तक बढ़ सकता है। यह बारिश, बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने से नदी में आने वाले पानी की मात्रा को दर्शाता है, जिससे बाढ़ जैसी घटनाओं की संभावना भी बढ़ेगी।


भारत के लिए संभावित खतरे

शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले एक सदी में तिब्बती पठार की गर्मी की दर विश्व औसत से दोगुनी रही है। इससे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आ रहा है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में जल अवसंरचना की योजना में इन परिवर्तनों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा, विशेषकर उन देशों के लिए जो नदी बेसिन साझा करते हैं। सदी के अंत तक ब्रह्मपुत्र में बहाव ऐतिहासिक स्तर से कहीं अधिक हो सकता है, जो भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम के लिए बाढ़ के संकट को बढ़ा सकता है।


चीन का विशाल डैम प्रोजेक्ट

ब्रह्मपुत्र, जिसे तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है, अरुणाचल में सियांग और असम में ब्रह्मपुत्र के नाम से जाना जाता है। चीन मेडोग में इस नदी पर 60,000 मेगावाट का हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है, जो थ्री गॉर्जेस डैम से तीन गुना बड़ा होगा। इसकी लागत लगभग 168 अरब डॉलर है। इस प्रकार, एक ओर अरुणाचल में स्थानीय विरोध और दूसरी ओर चीन के डैम से संभावित बाढ़ के खतरे ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।