इजराइल-ईरान तनाव: क्या बेंजामिन नेतन्याहू की सैन्य योजना में अमेरिका ने डाला था रोड़ा?
इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
इजराइल और ईरान के बीच टकराव की संभावनाएं फिर से चर्चा का विषय बन गई हैं। इजराइली टीवी चैनल-12 की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद के प्रमुख रोमन गोफमैन ने 27 अक्टूबर को प्रस्तावित चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ एक सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई थी। इस ऑपरेशन को लेकर इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था में भी मतभेद सामने आए हैं। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमला दोनों देशों को एक बड़े युद्ध में धकेल सकता है, जिससे इजराइल की घरेलू राजनीति और चुनावी प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एक सुरक्षा अधिकारी की गलती के कारण अमेरिका को इस संवेदनशील योजना की जानकारी मिल गई, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने हस्तक्षेप कर इस ऑपरेशन को रोक दिया। हालांकि, इस घटनाक्रम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
एक गलती ने अमेरिका तक पहुंचा दी हमले की जानकारी
चैनल-12 की रिपोर्ट में यह महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है कि इजराइल की सैन्य तैयारी की जानकारी अमेरिका तक कैसे पहुंची। बताया गया है कि एक सुरक्षा अधिकारी की गलती के कारण ऑपरेशन का रहस्य उजागर हो गया। जैसे ही वॉशिंगटन को इसकी जानकारी मिली, उसने तुरंत हस्तक्षेप किया।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन ने किस स्तर पर और किन माध्यमों से इजराइल पर दबाव डाला। लेकिन रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अमेरिकी दखल के बाद हमले की योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इजराइल में सैन्य मामलों पर लागू सेंसरशिप नियमों के तहत इस खबर के प्रसारण की बात भी कही गई है।
नेतन्याहू और सेना प्रमुख के बीच तनाव
इस विवाद में इजराइली सेना के प्रमुख इयाल जमीर की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 25 अक्टूबर को आई एक रिपोर्ट में नेतन्याहू और जमीर के बीच सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद सामने आए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, जमीर संभावित कार्रवाई के परिणामों को लेकर चिंतित थे। उनका मानना था कि ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करने और प्रधानमंत्री से लिखित कानूनी मंजूरी लेने की मांग की थी। 26 अक्टूबर को इजराइल के मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज की योजना का विरोध करने वाले जमीर अकेले प्रमुख सुरक्षा अधिकारी थे। हालांकि, नेतन्याहू ने इन खबरों को खारिज करते हुए उन्हें बकवास बताया।
नेतन्याहू के कार्यालय ने दावे को किया खारिज
इस रिपोर्ट के प्रकाश में आने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी प्रतिक्रिया दी। उसने चुनाव से पहले ईरान पर हमले की योजना होने के दावे को खारिज कर दिया। कार्यालय का कहना था कि नेतन्याहू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि चुनाव से पहले ऐसी किसी सैन्य कार्रवाई की योजना नहीं थी।
इस प्रकार, एक ओर मीडिया रिपोर्ट में गुप्त ऑपरेशन और अमेरिकी हस्तक्षेप का दावा किया गया है, वहीं दूसरी ओर इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे गलत बताया है। इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल अपुष्ट दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ट्रंप के सामने नेतन्याहू की चुनौती
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने की अपील की थी।
वहीं, ट्रंप फिलहाल बातचीत को और समय देने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ संवाद कर रहा है और पिछले छह-सात महीनों में अमेरिका का कोई सैनिक नहीं मारा गया है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने उसे रोकने के लिए कदम नहीं उठाए होते, तो इजराइल और पूरा मध्य पूर्व आज अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा होता।
मध्य पूर्व की राजनीति में अमेरिका की भूमिका
इस घटनाक्रम से एक बड़ा सवाल उठता है कि इजराइल की सुरक्षा रणनीति और अमेरिका की कूटनीतिक प्राथमिकताएं किस दिशा में आगे बढ़ेंगी। नेतन्याहू सैन्य विकल्प को कितना महत्व देते हैं और ट्रंप बातचीत को कितनी दूर तक ले जाना चाहते हैं, इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है।
फिलहाल, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर इजराइल के भीतर मतभेद और अमेरिका की कथित दखलंदाजी की खबर ने क्षेत्रीय कूटनीति को नई बहस दे दी है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और इजराइल के अगले कदम पर दुनिया की नजर रहेगी।