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इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव: अमेरिका की भूमिका

इजराइल ने ईरान पर एक प्रीमिएटिव स्ट्राइक का दावा किया है, जिसके बाद क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई है। अमेरिका ने इस हमले का समर्थन किया है, जबकि ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस तनाव के बीच, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है। जानें इस सैन्य संघर्ष के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
 

सैन्य टकराव की शुरुआत

सुबह होते ही आसमान में धुएं का गुबार, सायरनों की गूंज और अचानक एयर स्पेस का बंद होना। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि एक सैन्य टकराव की शुरुआत थी। इजराइल ने पहले हमले की रणनीति के तहत ईरान पर सैन्य कार्रवाई का दावा किया है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई है। इजराइल के रक्षा मंत्री ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी किया और देशभर में विशेष आपातकाल लागू कर दिया। इजराइल डिफेंस फोर्सेस ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है, क्योंकि मिसाइल हमलों की आशंका जताई जा रही है। इस ऑपरेशन में संयुक्त राज्य अमेरिका भी शामिल था।


अमेरिका का समर्थन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह ईरान को अपने न्यूक्लियर ढांचे को फिर से बनाने से रोकने का प्रयास था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि यदि ईरान की मौजूदा सरकार अपने हथियार नहीं डालती है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हमलों के बाद ट्रंप ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड और अन्य सुरक्षा बलों से कहा कि उन्हें अपने हथियार डालने चाहिए, अन्यथा उन्हें गंभीर खतरे का सामना करना पड़ेगा।


हमलों का लक्ष्य

इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी और सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया। यह तनाव स्विस शहर जिनेवा में हुई बातचीत के बाद बढ़ा, जिसमें ओमान ने मध्यस्थता की थी। हालांकि, ईरान के न्यूक्लियर सामग्री को बढ़ाने की रिपोर्ट ने इजराइल और अमेरिका के हमले का कारण बन सकती है। ईरान का दावा है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम नागरिक उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और इजराइल इसे हथियार बनाने के लिए मानते हैं।


बातचीत की निरंतरता

हालांकि कई घंटों की बातचीत के बाद कोई सहमति नहीं बन पाई, लेकिन ईरान और अमेरिका दोनों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है। ओमान के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष जल्द ही फिर से बातचीत शुरू करने की योजना बना रहे हैं, और अगले हफ्ते ऑस्ट्रिया के वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत होगी। एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि हमलों की तैयारी चार दिनों तक जारी रहेगी, और अगले दिन तेहरान पहले जैसा नहीं दिखेगा।