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इजराइल का अर्मेनियाई नरसंहार को मान्यता देने का प्रस्ताव, तुर्की में हलचल

इजराइल ने अर्मेनियाई नरसंहार को आधिकारिक रूप से मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है, जिससे तुर्की के साथ उसके रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। यह निर्णय इजराइल की संसद में पेश किया जाएगा, जबकि तुर्की ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मुद्दे पर इजराइल का रुख बदलने के पीछे गजा युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय तनाव भी हैं। क्या यह कदम तुर्की के साथ इजराइल के संबंधों को और खराब करेगा? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

इजराइल और तुर्की के बीच बढ़ता तनाव

इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके चलते इजराइल और तुर्की के बीच तनाव बढ़ सकता है। इस प्रस्ताव में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऑटोमन साम्राज्य के तहत अर्मेनियाई लोगों की मौतों को आधिकारिक रूप से नरसंहार के रूप में मान्यता दी गई है। हालांकि, इस निर्णय को अंतिम रूप देने के लिए इजराइली संसद की स्वीकृति अभी बाकी है। यह विषय नया नहीं है, क्योंकि 1915 के आसपास की घटनाओं को लेकर आज भी वैश्विक स्तर पर विभाजन है। अर्मेनिया और अन्य देशों का दावा है कि उस समय लगभग 15 लाख अर्मेनियाई लोगों की जानें ली गई थीं। कई इतिहासकार इसे 20वीं सदी का पहला नरसंहार मानते हैं। दूसरी ओर, तुर्की इस दावे को लगातार नकारता आया है, यह कहते हुए कि उस समय युद्ध और गृह संघर्ष के कारण मौतें हुई थीं, इसलिए इसे नरसंहार नहीं कहा जा सकता। इसी कारण तुर्की ने अन्य देशों से भी अपील की है कि वे इन घटनाओं को नरसंहार के रूप में मान्यता न दें। 


इजराइल का बदलता रुख

दिलचस्प बात यह है कि इजराइल ने इस मुद्दे पर कई वर्षों तक चुप्पी साधे रखी थी, क्योंकि वह तुर्की के साथ अपने संबंधों को खराब नहीं करना चाहता था। लेकिन हाल के वर्षों में, गजा युद्ध और लेबनान तथा ईरान के साथ तनाव के चलते दोनों देशों के रिश्तों में गिरावट आई है। अब इजराइल ने अपना रुख बदल लिया है। इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि अर्मेनियाई नरसंहार को नकारने और इतिहास को बदलने की कोशिश की गई है। उनके अनुसार, सही निर्णय लेने में कभी देर नहीं होती और यह इजराइल का नैतिक और ऐतिहासिक दायित्व है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका सहित 32 देशों ने पहले ही इन घटनाओं को नरसंहार के रूप में मान्यता दी है। अब यह प्रस्ताव संसद में पेश किया जाएगा। हालांकि, तुर्की की ओर से इस फैसले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 


इजराइल की अंतरराष्ट्रीय आलोचना

इस बीच, एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस इजराइल ने अर्मेनियाई नरसंहार को मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ाया है, वही गजा युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और तुर्की समेत कई देशों ने इजराइल पर गजा में नरसंहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। गजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए युद्ध में 73,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के कुछ स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इजराइल इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज करता है, यह कहते हुए कि वह आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाता और हमास नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इजराइल का यह निर्णय तुर्की के साथ उसके रिश्तों को और भी खराब करेगा?