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इजराइल पर हमलों में वृद्धि: ईरान के प्रॉक्सी संगठनों की सक्रियता

हाल के दिनों में इजराइल पर हमलों में तेजी आई है, जिसमें ईरान के प्रॉक्सी समूहों की सक्रियता प्रमुख है। लेबनान और यमन से हमले हो रहे हैं, और हिजबुल्ला ने भी अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं। इस स्थिति के पीछे ईरान का समर्थन और क्षेत्रीय तनाव का बढ़ना शामिल है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और इसके संभावित परिणामों पर एक नज़र डालें।
 

इजराइल पर हमले और ईरान की भूमिका

लेबनान और यमन से इजराइल पर हमले तेज हो गए हैं। ये हमले ईरान के प्रॉक्सी समूहों द्वारा किए जा रहे हैं, जिन्हें ईरान रेजिस्टेंस के रूप में संदर्भित करता है। यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है, जैसी ईरान ने पहले ही स्पष्ट की थी। ईरान ने कहा था कि यदि उन पर हमला हुआ, तो वे चारों ओर से जवाब देंगे। अब अरब देशों के बाद इजराइल को भी घेरने की कोशिश की जा रही है। हूती समूह, जिसे अंसार अल्लाह भी कहा जाता है, की ओर से मिसाइलें दागी जा रही हैं। लाल सागर में हमले काफी बढ़ गए हैं, और अमेरिका या इजराइल के किसी भी जहाज का वहां से गुजरना मुश्किल हो गया है।


हिजबुल्ला की सक्रियता

हिजबुल्ला ने दक्षिण लेबनान से मिसाइलें दागना शुरू कर दिया है, जो इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। हिजबुल्ला ने पहले ही घोषणा की थी कि वे हमले करेंगे और उन्हें कोई नहीं रोक सकता। भले ही लेबनान की सरकार इस स्थिति से खुद को अलग कर रही हो, लेकिन अब यह कोई मायने नहीं रखता। जैसे ही आयतुल्लाह अली खामनेई का ट्वीट आया कि युद्ध शुरू हो चुका है और हमें ईश्वर की मदद मिल रही है, हिजबुल्ला ने अपनी गतिविधियाँ तेज कर दी हैं।


रेजिस्टेंस संगठनों की बढ़ती सक्रियता

हिजबुल्ला और अंसारुल्लाह के अलावा, 40 से अधिक रेजिस्टेंस संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। यह जानकारी प्रेस टीवी की रिपोर्ट से प्राप्त हुई है। यमन से हमले फिर से शुरू होने की संभावना है, खासकर लाल सागर में। इस क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ रही है, और अमेरिका तथा इजराइल ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे शासन परिवर्तन के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।