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इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम: ट्रंप की घोषणा

इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम पर सहमति बनी है, जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की। उन्होंने दोनों देशों के नेताओं के साथ सकारात्मक बातचीत की और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाने का निर्देश दिया। यह वार्ता 1983 के बाद पहली बार हो रही है, जिसमें दोनों पक्ष शांति की इच्छा रखते हैं। नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की आपात बैठक भी बुलाई। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
 

युद्धविराम पर सहमति

इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के लिए युद्धविराम पर सहमति बनी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ सकारात्मक बातचीत की।


सीजफायर की औपचारिक घोषणा

ट्रंप ने बताया कि दोनों नेताओं ने अपने देशों के बीच शाम पांच बजे से औपचारिक रूप से 10 दिनों के सीजफायर पर सहमति बनाई है। मंगलवार को, 34 वर्षों में पहली बार, इन दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने वाशिंगटन डीसी में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ मुलाकात की।


शांति की दिशा में कदम

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और विदेश मंत्री रूबियो को जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन रेजिन केन के साथ मिलकर इजरायल और लेबनान के बीच स्थायी शांति स्थापित करने के लिए काम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में युद्धों को सुलझाना उनके लिए गर्व की बात है और यह उनका 10वां प्रयास होगा।


1983 के बाद पहली सार्थक वार्ता

1983 के बाद इजरायल और लेबनान के बीच होगी बैठक


इजरायली मीडिया के अनुसार, युद्धविराम पूर्वी मानक समय के अनुसार शाम 5 बजे और इजरायली समयानुसार गुरुवार-शुक्रवार रात 12 बजे से लागू होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह नेतन्याहू और जोसेफ आउन को व्हाइट हाउस में 1983 के बाद पहली बार सार्थक वार्ता के लिए आमंत्रित करेंगे। दोनों पक्ष शांति की इच्छा रखते हैं और उन्हें विश्वास है कि यह जल्द ही संभव होगा!


नेतन्याहू की आपात बैठक

नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट की आपात बैठक


युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद, नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की फोन पर आपात बैठक बुलाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रियों ने बिना मतदान के सीधे मीडिया को जानकारी मिलने पर नाराजगी व्यक्त की।


यह भी ध्यान देने योग्य है कि 28 फरवरी को इजरायल ने अमेरिका के सहयोग से ईरान पर एक बड़ा हमला किया। इसके दो दिन बाद, 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने उत्तर इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलों और रॉकेटों से हमला किया। इसके जवाब में, इजरायली सेना ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को नष्ट कर दिया।