इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम, लेकिन बमबारी जारी
युद्धविराम के बावजूद इजरायल की बमबारी
अमेरिका के दबाव के चलते इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम की घोषणा की गई है। फिर भी, इजरायल की ओर से लेबनान पर बमबारी का सिलसिला जारी है। इजरायली सेना ने बताया कि उसने हिजबुल्लाह के 150 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसमें कई लड़ाकों की मौत हुई है। उत्तरी इजरायल में विमानों की घुसपैठ के चलते सुरक्षा अलर्ट भी जारी किया गया है।
इजरायली हमले का विवरण
इजरायल की सेना ने आधी रात से हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी की, जिसमें दर्जनों लड़ाकों को मारा गया। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति के बाद यह इजरायल का सबसे बड़ा हमला है। इजरायली सैन्य प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने कहा कि उनकी सेना हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।
लेबनान में बमबारी के परिणाम
शुक्रवार को इजरायली बमबारी में लेबनान में 47 लोगों की जान गई, जिनमें दो बच्चे और सात महिलाएं शामिल हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इनमें से कितने हिजबुल्लाह से जुड़े थे। इजरायल ने अपने चार सैनिकों को भी खोया है।
युद्धविराम का समय
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, इजरायल और हिजबुल्लाह ने स्थानीय समयानुसार शुक्रवार शाम 4 बजे से युद्धविराम पर सहमति जताई है। हिजबुल्लाह के दो सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की है। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने बताया कि सीजफायर हो चुका है, लेकिन इजरायली सेना लेबनान से वापस नहीं लौटेगी।
ईरान की भूमिका
हालिया युद्धविराम में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अमेरिका और कतर ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम कराने में तेहरान की मदद ली। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इजरायली हमलों की निंदा की है और चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने युद्ध छेड़ा तो गंभीर परिणाम होंगे।
अमेरिका-ईरान समझौते पर खतरा?
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का अस्थायी युद्धविराम हो चुका है, लेकिन ईरान लेबनान में इजरायली हमले रोकने पर अड़ा है। इजरायल ने कहा है कि किसी भी खतरे की स्थिति में उसकी सेना कार्रवाई करेगी। हिजबुल्लाह और ईरान दोनों इस मुद्दे पर अड़े हुए हैं।
सीजफायर की स्थिति
इजरायली सेना का कहना है कि वह दक्षिणी लेबनान में 10 किमी से अधिक अंदर घुस चुकी है। लिटानी नदी के दक्षिण में इजरायल ने अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है। विश्लेषकों को चिंता है कि यदि दोनों पक्ष अपनी स्थिति पर अड़े रहे, तो सीजफायर टूट सकता है।