इजरायल का बड़ा सैन्य कदम: तेहरान में खामेनेई का विमान नष्ट
इजरायल की वायु सेना का दावा
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, इजरायल ने एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। इजरायली वायु सेना ने बताया कि उसने तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर एक विशेष विमान को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। इजरायल का कहना है कि यह विमान ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई और अन्य उच्च अधिकारियों के लिए उपयोग में था। इस कार्रवाई को ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय समन्वय क्षमताओं पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, यह विमान केवल यात्रा के लिए नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था।
ईरान के सहयोगी नेटवर्क पर प्रभाव
इजरायली सेना का कहना है कि इस विमान का उपयोग ईरानी अधिकारियों द्वारा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए किया जाता था, जिससे वे सहयोगी देशों के साथ संपर्क बनाए रखते थे। आईडीएफ ने बताया कि इस विमान का उपयोग सैन्य उपकरणों की खरीद और सहयोगी समूहों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए किया जाता था। इस प्रकार, विमान का नष्ट होना ईरान की रणनीतिक क्षमताओं को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पिछले हमले और उनके परिणाम
मेहराबाद एयरपोर्ट पर पहले भी हमले
रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया है। इसी महीने, इजरायली वायु सेना ने यहां कई विमानों पर हमले किए थे, जिसमें लगभग 16 विमानों को नष्ट करने का दावा किया गया था। इजरायली सेना का कहना है कि ये विमान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स द्वारा उपयोग किए जाते थे।
हथियार और नकदी पहुंचाने का आरोप
इजरायल के अनुसार, इन विमानों के माध्यम से क्षेत्र के विभिन्न समूहों को हथियार और धनराशि पहुंचाई जाती थी, विशेष रूप से लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों को। इजरायली सेना का यह भी कहना है कि ईरान ने इन विमानों को पहचान से बचाने के लिए छिपाने की कोशिश की थी, जिससे उन्हें ढूंढना और निशाना बनाना कठिन हो गया।
क्षेत्रीय संघर्ष की बढ़ती स्थिति
बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष
पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में तनाव में वृद्धि हो रही है। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई थी। इसके बाद ईरान ने भी कई स्थानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन घटनाओं के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है और कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
यह बढ़ता संघर्ष केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।