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इजरायल की दक्षिणी लेबनान में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर UN की कड़ी प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया बैठक में इजरायल से दक्षिणी लेबनान में अपनी सेना को हटाने की मांग की गई। अधिकांश देशों ने इजरायल की सैन्य कार्रवाई की निंदा की, जबकि अमेरिका ने अलग रुख अपनाया। बैठक का आयोजन फ्रांस के अनुरोध पर किया गया था, जहां लेबनान में स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने हमले जारी रखे, तो वह अमेरिका के साथ शांति वार्ता को रोक देगा। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक में इजरायल से सेना हटाने की मांग


नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक 01 जून 2026 को आयोजित की गई, जिसमें अधिकांश देशों ने एक स्वर में इजरायल से अपनी सेना को दक्षिणी लेबनान से वापस बुलाने का आग्रह किया। अमेरिका ने इस मामले में अलग रुख अपनाया। सभी सदस्यों ने इजरायल से लेबनान पर हमले की धमकी को वापस लेने की भी अपील की।


फ्रांस के अनुरोध पर बुलाई गई बैठक

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह बैठक फ्रांस के अनुरोध पर आयोजित की गई थी। लेबनान में स्थिति अत्यंत गंभीर है, जहां हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। शरणार्थी शिविरों में जगह की कमी हो गई है और चारों ओर भय का माहौल है। इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी क्षेत्रों पर हमले की चेतावनी दी थी। एक दिन पहले, इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में और गहराई में प्रवेश किया था, जिससे सैन्य कब्जे की आशंका बढ़ गई थी।


ट्रंप के हस्तक्षेप से कुछ राहत

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद तनाव में कुछ कमी आई। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इजरायल को लेबनान पर हमले से रोका है और हिज्बुल्लाह से भी अपील की है कि वे इजरायल पर हमला न करें। हिज्बुल्लाह ने मार्च की शुरुआत में ईरान के समर्थन में इजरायल पर हमला किया था, जिसके बाद से इजरायल लगातार लेबनान पर हमले कर रहा है ताकि हिज्बुल्लाह को समाप्त किया जा सके। लेबनान सरकार इजरायल के साथ सीधी बातचीत कर रही है, लेकिन हिज्बुल्लाह पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है।


ईरान का कड़ा संदेश

ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि इजरायल बेरूत पर हमले जारी रखता है, तो वह अमेरिका के साथ शांति वार्ता को रोक देगा। ईरान की एक शर्त यह भी है कि सभी मोर्चों पर लड़ाई समाप्त होनी चाहिए। रविवार को, इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया, जो 1982 से 2000 तक इजरायल का मुख्यालय था। वहां इजरायली झंडा फहराने से लेबनान और अन्य देशों में गुस्सा भड़क गया।


संयुक्त राष्ट्र का बयान

संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी मार्था आमा अक्या पोबी ने कहा कि ब्लू लाइन के उत्तर में इजरायल की उपस्थिति लेबनान की संप्रभुता का उल्लंघन है। यह दुश्मनी पूरे क्षेत्र में फैल रही है। ब्लू लाइन वह सीमा है जो इजरायल को लेबनान और गोलान हाइट्स से अलग करती है।


इजरायल की आलोचना

सुरक्षा परिषद में फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन ने इजरायल की कड़ी आलोचना की। फ्रांस के राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने कहा कि इजरायल लेबनान में एक बड़ी रणनीतिक गलती कर रहा है। हिज्बुल्लाह के हमलों से बचाव का अधिकार है, लेकिन मौजूदा सैन्य कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता। ब्रिटेन के उप राजदूत जेम्स कारियुकी ने कहा कि इजरायल की लापरवाह कार्रवाई से लेबनानी नागरिकों की समस्याएं बढ़ेंगी।


इजरायल का बचाव

इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा कि इजरायल तनाव बढ़ाना नहीं चाहता और न ही लेबनान की भूमि पर कब्जा करना चाहता है। उनके अनुसार, समस्या हिज्बुल्लाह है जिसने मार्च में ईरान के समर्थन में इजरायल पर हमला किया। उन्होंने कहा कि हाल के हफ्तों में हिज्बुल्लाह के हमले बढ़ गए हैं।


अन्य देशों की अपील

बहरीन, पाकिस्तान, डेनमार्क, लाइबेरिया और कोलंबिया जैसे कई देशों ने इजरायल से तुरंत तनाव कम करने की अपील की। लेबनान के राजदूत अहमद अराफा ने सुरक्षा परिषद से एकजुट होकर इजरायल की निंदा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि परिषद बार-बार हमले रोकने में असफल रही है, जिससे इजरायल को खुली छूट मिल गई है।