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इजरायल की राजनीति में भूचाल: नेतन्याहू की कुर्सी पर खतरा

इजरायल की संसद ने भंग करने के लिए मतदान किया है, जिससे बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति पर संकट गहरा गया है। इस निर्णय ने आम चुनाव की संभावना को बढ़ा दिया है, और नेतन्याहू को कई मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनके नेतृत्व के खिलाफ जनता में नाराजगी बढ़ रही है, और हाल के ओपिनियन पोल्स में अधिकतर नागरिकों ने उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने की इच्छा जताई है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
 

इजरायल की संसद में बड़ा राजनीतिक परिवर्तन

इजरायल की राजनीतिक स्थिति में इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। बुधवार को, सांसदों ने संसद (नेसेट) को भंग करने के लिए एक विधेयक के पक्ष में भारी मतदान किया, जिससे आम चुनाव की संभावना काफी बढ़ गई है। इस निर्णय ने बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति को खतरे में डाल दिया है।


नेतन्याहू के लिए राजनीतिक झटका

यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक गंभीर झटका माना जा रहा है, जो पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहे हैं। उनकी दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार कमजोर पड़ती दिख रही है, और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियों के साथ-साथ आम जनता में भी उनके नेतृत्व के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है।


संसद भंग करने के लिए 110 वोट

स्थानीय मीडिया के अनुसार, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में लगभग 110 सांसदों ने संसद भंग करने के विधेयक के समर्थन में मतदान किया। अब यह विधेयक एक विशेष समिति के पास भेजा जाएगा, जहां अगली चुनाव की तारीख तय की जाएगी। इसके बाद, इसे कानून बनने से पहले संसद में तीन और चरणों से गुजरना होगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो इजरायल के संविधान के अनुसार 90 दिनों के भीतर आम चुनाव कराना अनिवार्य होगा।


गठबंधन में सहयोगियों की बगावत

बेंजामिन नेतन्याहू, जो इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं, इस बार अपनी कुर्सी को लेकर चिंतित हैं। वह ईरान, लेबनान के हिज्बुल्लाह और गाजा के साथ चल रहे संघर्ष के कारण रक्षा विशेषज्ञों के निशाने पर हैं।


जनता में आक्रोश और आरोप

इस राजनीतिक संकट के बीच, नेतन्याहू पर 2020 से धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा है। हालांकि, वह खुद को राजनीतिक साजिश का शिकार मानते हैं। 2023 में हुए हमास के हमले के बाद, जनता उन्हें सुरक्षा में चूक का जिम्मेदार मानती है। हालिया ओपिनियन पोल्स में 55 प्रतिशत से अधिक इजरायली नागरिकों ने कहा है कि नेतन्याहू को अब प्रधानमंत्री पद से हट जाना चाहिए।