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इजरायल की सैन्य रणनीतियाँ: युद्धविराम के बावजूद हमले क्यों?

इस लेख में इजरायल की सैन्य रणनीतियों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें यह समझाया गया है कि युद्धविराम के बावजूद इजरायल क्यों हमले करता है। इजरायल की खुफिया गतिविधियों, पिछले हमलों और मबाम रणनीति के महत्व पर चर्चा की गई है। जानें कि कैसे इजरायल अपने दुश्मनों को कमजोर करने के लिए सक्रिय रहता है और युद्ध की स्थिति को कैसे संभालता है।
 

इजरायल के हमलों के पीछे की रणनीति

क्या आपने कभी सोचा है कि इजरायल युद्धविराम का उल्लंघन क्यों करता है? जब सभी पक्ष शांत होते हैं, तो अचानक उसकी सेना दुश्मनों के ठिकानों पर हमला क्यों कर देती है? युद्ध शुरू होता है और फिर अन्य देशों के हस्तक्षेप पर रुक जाता है, लेकिन इजरायल की सेना बीच-बीच में अपने अभियानों को जारी रखती है। गाजा में शांति के बाद लेबनान में संघर्ष बढ़ा दिया गया। जब लेबनान में युद्धविराम हुआ, तो ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई। ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होने पर फिर से लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ बमबारी की गई। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यह इजरायल की सनक है या कोई विशेष रणनीति। आइए इसे समझते हैं।


इजरायल की खुफिया और सैन्य गतिविधियाँ

इजरायल की सेना और खुफिया एजेंसी हमेशा सक्रिय रहती हैं। ये मध्य पूर्व में अपने दुश्मनों पर नजर रखती हैं और संभावित खतरों का आकलन करती हैं। यदि इजरायल के लिए कोई संकट उत्पन्न होता है, तो सेना और खुफिया एजेंसी उस लक्ष्य पर हमला करती हैं। यह हमला खुफिया, सैन्य या साइबर किसी भी रूप में हो सकता है।


इजरायल के हमले के उदाहरण

2019 में, इजरायल ने इराक में एक शिया मिलिशिया से जुड़े हथियार डिपो पर हमला किया, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त था। इस हमले में गाइडेड मिसाइल और ड्रोन भंडार नष्ट कर दिए गए। यह हथियारों का जखीरा लेबनान में हिजबुल्लाह तक पहुंचने वाला था, लेकिन इजरायल ने उसे पहले ही नष्ट कर दिया।


2020 में, ईरान के एक उन्नत सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा पर बड़ा धमाका हुआ, जिससे वह पूरी तरह से नष्ट हो गई। इस हमले में इजरायल की संलिप्तता पर संदेह जताया गया।


सीरिया में इजरायल का गुप्त मिशन

2010 के दशक में, इजरायल ने सीरिया में हिजबुल्लाह के खिलाफ एक गुप्त अभियान चलाया, जिससे संगठन को भारी नुकसान हुआ। इजरायल ने हिजबुल्लाह को कमजोर करने के लिए कई प्रकार के हमले किए, जैसे बमबारी, साइबर हमले, और हथियारों की जब्ती।


इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों की जंग

पिछले साल जून में, इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक संघर्ष चला, जिसमें कई ईरानी नेता मारे गए और मिसाइल सुविधाएँ नष्ट की गईं। अचानक 12वें दिन युद्धविराम की घोषणा की गई। यह इजरायल की रणनीति का हिस्सा था।


मबाम रणनीति का महत्व

इजरायल की मबाम रणनीति का उद्देश्य दुश्मन की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और तनाव को बढ़ने से रोकना है। इसका मतलब है कि इजरायल दुश्मनों पर हमले करता है, लेकिन स्थिति को बिगड़ने से पहले संभालने की कोशिश करता है।


इजरायल अब मबाम से आगे बढ़कर खतरों का और सक्रिय तौर पर सामना करेगा। अब खतरों को दबाने का कोई रास्ता नहीं है। अब मबाम जैसी कोई रणनीति नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, इजरायली प्रधानमंत्री।