इजरायल के फैसले पर मुस्लिम देशों का विरोध: क्या है सोमालीलैंड का विवाद?
नई दिल्ली में इजरायल के निर्णय पर विवाद
नई दिल्ली: इजरायल के हालिया निर्णय ने वैश्विक स्तर पर एक नया विवाद उत्पन्न कर दिया है। कतर, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की सहित 16 मुस्लिम देशों ने सोमालीलैंड में राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने के इजरायली फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, इसे संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए।
विदेश मंत्रियों का संयुक्त बयान
18 अप्रैल 2026 को दोहा में इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इजरायल के इस कदम की कड़ी निंदा की गई। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सोमालिया संघीय गणराज्य की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है।
इजरायल के कदम पर कड़ी आपत्ति
विदेश मंत्रियों ने अपने बयान में कहा कि इजरायल का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने इसे एक खतरनाक मिसाल बताते हुए चेतावनी दी कि इससे अन्य क्षेत्रों में भी विवाद बढ़ सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सोमालिया की वैध सरकारी संस्थाएं ही वहां की जनता का प्रतिनिधित्व करती हैं और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कौन-कौन से देश शामिल हैं?
इस संयुक्त विरोध में कतर, कुवैत, सऊदी अरब, मिस्र, सोमालिया, सूडान, लीबिया, बांग्लादेश, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, तुर्की, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, मॉरिटानिया, जॉर्डन और ओमान के विदेश मंत्री शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में ऐसे किसी भी एकतरफा कदम को खारिज किया जो किसी देश की एकता को कमजोर करता हो।
क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि इजरायल का यह निर्णय अफ्रीकी संघ के संविधान अधिनियम का उल्लंघन करता है। देशों ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई से हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर पड़ेगा।
सभी 16 देशों ने सोमालिया की संप्रभुता और अखंडता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया।
कूटनीतिक तनाव में वृद्धि
सोमालीलैंड को लेकर उठाए गए इस कदम से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में तनाव बढ़ गया है। कतर के विदेश मंत्रालय ने सोमालीलैंड को 'तथाकथित' क्षेत्र बताते हुए वहां इजरायली दूत की नियुक्ति को अवैध करार दिया है।
मुस्लिम देशों का कहना है कि यह एकतरफा फैसला सोमालिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है और इसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शांति बनाए रखने की अपील
विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सोमालिया की संप्रभुता और एकता का सम्मान करें। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से क्षेत्र में चल रही शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इन देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे सोमालिया की अखंडता की रक्षा के लिए कूटनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास जारी रखेंगे और ऐसे किसी भी दूत को मान्यता नहीं देंगे।