इजरायल चुनाव: नेतन्याहू की सत्ता पर संकट, आइजेनकोट का गठबंधन आगे
चुनाव के बाद एग्जिट पोल के संकेत
नई दिल्ली: इजरायल में हाल ही में हुए चुनावों के एग्जिट पोल ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्थिति को चुनौती में डाल दिया है। तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों के अनुमानों के अनुसार, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला राजनीतिक गठबंधन आगे चल रहा है। हालांकि, किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना नहीं है, जिससे सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच जोड़-तोड़ की संभावना बढ़ गई है। यह चुनाव नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक करियर की एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।
आइजेनकोट के गठबंधन को एग्जिट पोल में बढ़त
इजरायल के तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों के एग्जिट पोल में आइजेनकोट के नेतृत्व वाले खेमे को नेतन्याहू के गठबंधन से आगे बताया गया है। चैनल 13 के अनुसार, आइजेनकोट के ब्लॉक को 53 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि नेतन्याहू के खेमे को 50 सीटें मिलने का अनुमान है।
सरकारी प्रसारक कान (Kan) के एग्जिट पोल में आइजेनकोट के गठबंधन को 55 और नेतन्याहू के पक्ष को 50 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। चैनल 12 के अनुमान में भी आइजेनकोट का खेमा 52 सीटों के साथ आगे है, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को 50 सीटें मिल सकती हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर किसी भी पक्ष की सरकार बनना तय नहीं माना जा सकता। इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में छोटे दलों का समर्थन सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मतदान में रिकॉर्ड उत्साह और नेतन्याहू की चुनौतियाँ
इस बार इजरायल में मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। मतदान समाप्त होने से दो घंटे पहले तक 74.3 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी, और अंतिम मतदान प्रतिशत 75 फीसदी से ऊपर जाने की उम्मीद है। यह 1988 के बाद से सबसे ऊंचा मतदान स्तर है।
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा ईरान के साथ हुए संघर्षों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव था। सुरक्षा, युद्ध और सरकार की नीतियां मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे बने रहे।
नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को देश के भीतर विरोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव का सामना करना पड़ा है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को इजरायल की सुरक्षा और उसके विरोधियों से मुकाबला करने के लिए सबसे उपयुक्त नेता के रूप में पेश किया। 77 वर्षीय नेतन्याहू पिछले तीन दशकों में करीब 19 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
7 अक्टूबर के हमले और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस चुनाव में नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों से पहले सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी। नेतन्याहू भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। हमास के नेतृत्व में हुए हमलों में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था।
विपक्षी दलों ने इन घटनाओं की जवाबदेही तय करने के लिए राष्ट्रीय जांच कराने का वादा किया है। वहीं, नेतन्याहू ऐसी जांच का विरोध करते रहे हैं। इन आलोचनाओं के बावजूद उनका राष्ट्रवादी समर्थक आधार मजबूत बना हुआ है। इजरायल की चुनावी व्यवस्था में विभिन्न विचारधाराओं वाले विपक्षी दलों के लिए एकजुट होकर सरकार बनाना भी आसान नहीं है।
मतदान के दौरान नेतन्याहू ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह निर्णायक समय है और लोगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने वामपंथी और अरब इजरायली मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी को अपने गठबंधन के लिए चुनौती बताया।
गादी आइजेनकोट: नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी
66 वर्षीय गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख हैं और इस चुनाव में नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आए हैं। सुरक्षा मामलों पर उनका रुख सख्त माना जाता है, जबकि घरेलू मुद्दों पर उन्होंने खुद को मध्यमार्गी नेता के तौर पर पेश किया है। गाजा युद्ध में उन्होंने अपने एक बेटे और दो भतीजों को खो दिया था।
आइजेनकोट ने करीब चार साल पहले राजनीति में कदम रखा था। 7 अक्टूबर के हमलों के बाद वह नेतन्याहू के युद्ध मंत्रिमंडल में शामिल हुए, लेकिन आठ महीने बाद प्रधानमंत्री के नेतृत्व की आलोचना करते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन को भी अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया। ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान ट्रंप उनके करीबी सहयोगी रहे हैं।
यदि चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो सरकार बनाने के लिए कई हफ्तों तक बातचीत चल सकती है। आवश्यकता पड़ने पर दोबारा चुनाव कराने की स्थिति भी बन सकती है। इस दौरान नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं। अब सभी की नजरें अंतिम नतीजों पर हैं, जिनसे तय होगा कि इजरायल की अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी।