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इजरायल चुनाव: नेतन्याहू की सत्ता पर संकट या विपक्ष की नई उम्मीद?

इजरायल में हालिया चुनावों में बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि ना तो नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत तक पहुंच रहा है और ना ही विपक्ष आसानी से सरकार बनाने की स्थिति में है। अरब पार्टियों की भूमिका इस चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकती है, जो सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले सकती हैं। जानें इस चुनावी गणित का पूरा विश्लेषण और क्या नेतन्याहू फिर से प्रधानमंत्री बन पाएंगे या विपक्ष उन्हें सत्ता से बाहर कर पाएगा।
 

इजरायल चुनाव की स्थिति

इजरायल में हालिया चुनावों में कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। वोटों की गिनती जारी है, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू फिर से प्रधानमंत्री बन पाएंगे या उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त होने वाली है। चुनावी परिणामों में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ना तो नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत तक पहुंच रहा है और ना ही विपक्ष आसानी से सरकार बनाने की स्थिति में है। कुछ क्षेत्रों में 51 बनाम 51 का मुकाबला है, जबकि नेतन्याहू का गठबंधन 55 सीटों पर आगे चल रहा है। लेकिन सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की आवश्यकता है। यदि दोनों प्रमुख खेमे बहुमत से दूर रहते हैं, तो सत्ता की चाबी अरब पार्टियों के हाथ में जा सकती है, जिनका समर्थन इजरायल की राजनीति में हमेशा विवादास्पद रहा है।


चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण

इजरायल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। वर्तमान में, चुनावी आंकड़े इस दिशा में स्पष्ट नहीं हैं। सरकारी प्रसारक कान 11 के एग्जिट पोल के अनुसार, नेतन्याहू और उनके विरोधियों को 51-51 सीटें मिलने का अनुमान है। चैनल 12 के अनुसार, नेतन्याहू के गठबंधन को 50 और विपक्ष को 52 सीटें मिलने की संभावना है। डायरेक्ट पोल्स में नेतन्याहू के ब्लॉक को 55 सीटें और विपक्ष को 49 सीटें मिलने का अनुमान है। हालांकि, इन अनुमानों में भिन्नता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि किसी भी खेमे के लिए बहुमत प्राप्त करना आसान नहीं होगा।


नेतन्याहू की चुनौती और विपक्ष की रणनीति

नेतन्याहू, जो इजरायल की राजनीति के अनुभवी नेताओं में से एक हैं, को इस बार पूर्व इजराइली सेना प्रमुख गादी आइजनककोट से चुनौती मिल रही है। विपक्ष का प्रयास है कि वे विभिन्न राजनीतिक ताकतों को एकजुट कर सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत प्राप्त करें। हालांकि, यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि नेतन्याहू के विरोध में खड़े नेताओं को एक साथ लाना और सरकार बनाने के लिए सहमति बनाना दो अलग-अलग बातें हैं।


अरब पार्टियों की भूमिका

इस चुनाव में अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि नेतन्याहू के गठबंधन को 55 सीटें मिलती हैं, तो उन्हें बहुमत के लिए छह और सांसदों का समर्थन चाहिए होगा। दूसरी ओर, विपक्ष को भी बहुमत तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। इस स्थिति में, छोटी पार्टियां और अरब राजनीतिक दल निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

इस चुनाव की चर्चा केवल इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अमेरिकी राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू की चुनावी स्थिति पर प्रतिक्रिया दी है और अपने समर्थन का श्रेय दिया है। हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ट्रंप का राजनीतिक दावा हमेशा विवादास्पद होता है। हाल ही में, नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी, जिसमें दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और शांति बहाल करने पर चर्चा की।