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इजरायल ने भारत को बताया पाकिस्तान से बेहतर मध्यस्थ, जानें क्या कहा

इजरायल ने हाल ही में कहा है कि भारत पाकिस्तान की तुलना में एक बेहतर मध्यस्थ हो सकता है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच। इजरायली विशेष दूत फ्लूर हसन-नहूम ने भारत की सराहना की और पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर सवाल उठाए। इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आयोजित करने की बात की है, जबकि ईरान ने बातचीत से इनकार किया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

भारत की मध्यस्थता की क्षमता पर इजरायल का बयान


इजरायल ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की तुलना में भारत एक बेहतर मध्यस्थ के रूप में उभर सकता है। यह टिप्पणी उस समय आई है जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयास कर रहा है। इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लूर हसन-नहूम ने एक साक्षात्कार में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत इजरायल का करीबी सहयोगी है और इस भूमिका में अधिक सक्षम हो सकता है।


पाकिस्तान की प्रासंगिकता पर सवाल

इजरायली विशेष दूत ने पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'मुझे नहीं पता कि पाकिस्तान के लोग क्या सोचते हैं। ऐसा लगता है कि वे खुद को प्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे खुद जिहादी आतंकवाद के मामले में एक बड़ी समस्या हैं।'


भारत की मध्यस्थता की सराहना

फ्लूर हसन-नहूम ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा, 'भारत इजरायल का एक बहुत करीबी सहयोगी है। आपके प्रधानमंत्री युद्ध शुरू होने से पहले यहां आए थे। हम मानते हैं कि भारत सभी देशों के साथ अच्छे संबंध रखता है। यदि आप मुझसे पूछें, तो वे पाकिस्तान की तुलना में कहीं बेहतर मध्यस्थ हो सकते हैं।'


पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में कहा कि सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के बाद इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आयोजित करेगा। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में गंभीर संकट उत्पन्न हो गए हैं।


ईरान का बातचीत से इनकार

ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने पर बातचीत करने से इनकार कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान को मध्यस्थों के माध्यम से संदेश मिले हैं कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उनकी शर्तें अतार्किक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है, जबकि अमेरिका अपने रवैये में बदलाव करता रहा है।