इजरायल-ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव: वेस्ट बैंक पर प्रतिबंध और फॉकलैंड द्वीप समूह का विवाद
ब्रिटेन और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव
इजरायल और ब्रिटेन के संबंधों में तेजी से गिरावट आ रही है। ब्रिटिश सरकार ने इजरायल पर वेस्ट बैंक में जातीय सफाए का आरोप लगाया है। ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कहा कि वेस्ट बैंक में बस्तीवादी आतंकवादी फिलिस्तीनियों का सफाया कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के साथ सभी प्रकार के संबंधों और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। फ्रांस और कनाडा सहित 12 देशों ने इस प्रतिबंध का समर्थन किया है।
इजरायल की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के इस कदम के बाद इजरायल के साथ तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सा'आर ने जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने ब्रिटेन के 12 सांसदों पर इजरायल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा, यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने और अंतरराष्ट्रीय गाजा सहायता केंद्र से ब्रिटेन के प्रतिनिधियों को निकालने का भी निर्णय लिया गया।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के प्रतिबंध पर अमेरिका ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ब्रिटेन की तरह वेस्ट बैंक की बस्तियों पर व्यापार प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कहा कि अमेरिका ब्रिटेन पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। फ्लोरिडा के रिपब्लिकन कांग्रेसी रैंडी फाइन ने कहा कि ब्रिटेन की कंपनियों को फ्लोरिडा में काम करने से रोका जा सकता है।
फॉकलैंड द्वीप समूह का विवाद
ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक पर इजरायली कब्जे को अवैध बताया है। इसके जवाब में, इजरायल ने फॉकलैंड द्वीप समूह पर ब्रिटेन के कब्जे को भी अवैध करार दिया। कई इजरायली मंत्रियों ने फॉकलैंड के मुद्दे पर ब्रिटेन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने ब्रिटिश राजदूत को देश से निकालने की मांग की।
अर्जेंटीना की स्थिति
फॉकलैंड द्वीप समूह पर अर्जेंटीना के तेवर भी तल्ख हैं। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने कहा कि उनकी संप्रभुता का उल्लंघन किया गया है और वे अपने हितों की रक्षा करेंगे। उन्होंने द्वीप समूह में तेल निकालने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी भी दी है।
ट्रंप का बयान
फॉकलैंड द्वीप समूह का मामला केवल इजरायल, ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच नहीं है, बल्कि अमेरिका भी इसमें रुचि दिखा रहा है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया कि वह इस द्वीप समूह पर ब्रिटिश संप्रभुता पर दोबारा विचार कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि अगर अर्जेंटीना फॉकलैंड द्वीप समूह पर हमला करता है, तो अमेरिका ब्रिटेन का समर्थन नहीं करेगा।