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इजरायल में गादी आइजेनकोट को मिली सरकार बनाने की जिम्मेदारी

इजरायल में हालिया चुनावों के बाद, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने गादी आइजेनकोट को नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन आइजेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और क्या होगा आगे।
 

नेतन्याहू को राजनीतिक झटका

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को हाल ही में एक बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक संघर्ष के बीच, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट को नई सरकार बनाने का कार्य सौंपा है। 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। सरकार गठन के लिए 61 सीटों की आवश्यकता है, जिसे कोई भी प्रमुख गठबंधन अकेले नहीं प्राप्त कर सका।


चुनाव परिणाम

इजरायल की 120 सीटों वाली नेसेट में, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने 48 सीटें हासिल की हैं। इसके अतिरिक्त, अरब दलों (द जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी) ने 19 सीटें प्राप्त की हैं, जो उनके लिए एक रिकॉर्ड है। इन 19 सीटों के साथ, द जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी ने आइजेनकोट का समर्थन किया है।


आइजेनकोट को सरकार बनाने का न्योता क्यों?

इजरायल में चुनाव के बाद सरकार गठन का निर्णय लेने में राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राष्ट्रपति उस नेता को सरकार बनाने का आमंत्रण देते हैं, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना होती है। इसके लिए राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श करते हैं।


संसद में सीटों का बंटवारा

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने 27 सीटें जीती हैं, जो किसी भी पार्टी के लिए सबसे अधिक हैं। हालांकि, उनके गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के लिए आवश्यक 61 सीटों से 8 सीटें कम हैं। दूसरी ओर, आइजेनकोट की याशर पार्टी ने 21 सीटें जीती हैं और संसद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। उनके चार दलों वाले यहूदी गठबंधन के पास कुल 48 सीटें हैं।


आइजेनकोट का समर्थन

राष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान, अरब पार्टियों ने आइजेनकोट के नाम का समर्थन किया है। इस समर्थन के बाद, गादी आइजेनकोट को कुल 67 सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ है, जिससे वह इजरायल की 120 सीटों वाली नेसेट में 61 के बहुमत के आंकड़े को पार करने में सक्षम दिख रहे हैं।