इजरायल में चुनाव: नेतन्याहू की चुनौती और संभावित उत्तराधिकारी
इजरायल में चुनाव की तैयारी
इजरायल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने जा रहे हैं। विभिन्न ओपिनियन पोल यह संकेत दे रहे हैं कि वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता से बाहर हो सकते हैं। इस बीच, उन नेताओं की चर्चा भी शुरू हो गई है जो भविष्य में प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी कर सकते हैं। इनमें कुछ पूर्व प्रधानमंत्री और नेतन्याहू के पुराने तथा वर्तमान सहयोगी शामिल हैं। मंगलवार से चुनाव के प्रारंभिक परिणाम आने लगेंगे, और 4 नवंबर को अंतिम परिणाम घोषित किए जाएंगे। इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था के अनुसार, यह निश्चित नहीं है कि 4 नवंबर को यह स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी सरकार बनेगी।
इजरायल की चुनावी प्रणाली
इजरायल में सबसे बड़ी पार्टी के बजाय सबसे बड़े गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिलता है। यहां की चुनावी प्रणाली ऐसी है कि किसी भी पार्टी को अकेले सरकार बनाने का मौका नहीं मिला है। इसके लिए किसी पार्टी को 51 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त करने होंगे। वर्तमान में, नेतन्याहू भी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन इस बार उन्हें गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
नेतन्याहू को चुनौती देने वाले नेता
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट भी इस बार चुनाव में उम्मीदवार हैं। हालांकि, सबसे अधिक चर्चा 66 वर्षीय गाड़ी आइजेनकोट की हो रही है, जो इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने गाजा संघर्ष में अपने एक बेटे को खोया है और नई याशर पार्टी की स्थापना की है। वह नेतन्याहू के प्रधानमंत्री रहते इजरायल की वार कैबिनेट का हिस्सा थे, लेकिन 2024 में नेतन्याहू से टकराव के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
दूसरे उम्मीदवार नफ्ताली बेनेट हैं, जो 54 वर्ष के पूर्व कमांडो हैं और नेतन्याहू के सहयोगी रह चुके हैं। इस बार उन्होंने पूर्व प्रीमियर याइर लेपिड के साथ मिलकर 'टुगेदर' नामक पार्टी बनाई है।
तीसरा प्रमुख नाम याइर गोलन का है, जो 64 वर्ष के हैं और 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों के बाद किए गए रेस्क्यू अभियान के कारण चर्चा में आए। वह अब डेमोक्रैट्स पार्टी के नेता हैं, जो पुरानी लेबर पार्टी और लेफ्ट विंग मेरेट्स के विलय से बनी है।
इसके अलावा, 68 वर्षीय पूर्व रक्षा मंत्री एविगडोर लिबेरमैन भी चुनावी दौड़ में हैं। वह नेतन्याहू की कैबिनेट में थे, लेकिन 2018 में इस्तीफा दे दिया था। अब वह इजरायल आवर होम पार्टी के नेता हैं।
इजरायल में चुनाव प्रक्रिया
इजरायल में मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से होता है। यहां के लोग किसी नेता के लिए वोट नहीं डालते, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए वोट देते हैं। पार्टियों को मिले वोटों के आधार पर सीटों का वितरण होता है। इसके लिए किसी पार्टी को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट प्राप्त करने होते हैं।
इजरायल की संसद, जिसे Knesset कहा जाता है, में कुल 120 सदस्य होते हैं। बहुमत के लिए 61 सीटें चाहिए। चुनाव में मिले वोटों के अनुसार तय होता है कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी पार्टी को 10 प्रतिशत वोट मिलते हैं, तो उसे लगभग 10 प्रतिशत सीटें मिलेंगी।
इजरायल में उम्मीदवारों की सूची सीरियल नंबर के अनुसार दी जाती है। चुनाव परिणाम के बाद, पहले से दी गई सूची के अनुसार सदस्यों का चयन किया जाता है।
सरकार गठन की प्रक्रिया
सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा 28 दिन का समय दिया जाता है, जिसे 14 दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है। इस दौरान, सरकार बनाने वाले नेता को बहुमत जुटाना होता है। यह जरूरी नहीं है कि वह सबसे बड़ी पार्टी का नेता हो; वह कम सीटों वाले दलों को साथ लाकर भी सरकार बना सकता है।
इजरायल में कभी भी एक पार्टी की सरकार नहीं बनती, हमेशा गठबंधन की सरकार बनती है। वर्तमान में, नेतन्याहू की सरकार भी एक गठबंधन सरकार है। 2022 के चुनाव में, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 32 सीटें मिली थीं।
बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक सफर
बेंजामिन नेतन्याहू लिकुड पार्टी के नेता हैं। उन्होंने 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री पद संभाला, जो 3 साल 18 दिन चला। इसके बाद, तीन चुनावों में उनकी वापसी नहीं हो पाई। हालांकि, 2009 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने और 13 जून 2021 तक लगातार 12 साल तक इस पद पर रहे।
2021 में नफ्ताली बेनेट सत्ता में आए, लेकिन केवल 1 साल 17 दिन तक ही रह सके। इसके बाद याइर लेपिड ने 181 दिन तक सरकार चलाई। अंततः 2022 के अंत में नेतन्याहू की सरकार फिर से बनी।