इज़राइल के चुनाव परिणाम: अरब पार्टियों का उभार और राजनीतिक गतिरोध
इज़राइल के चुनावों में नया राजनीतिक समीकरण
इज़राइल के हालिया संसदीय चुनावों के प्रारंभिक परिणामों ने वहां की राजनीतिक स्थिति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। 120 सदस्यों वाली नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता होती है, लेकिन न तो नेतान्याहू का सत्ताधारी समूह और न ही गादी आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन इस आंकड़े तक पहुंच सका है। इस राजनीतिक संकट के बीच, इज़राइल की अरब-बहुल पार्टियों ने 19 सीटें जीतकर सत्ता के केंद्र में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। 'जॉइंट लिस्ट' और 'रा'अम' जैसी पार्टियों की विचारधाराएं भले ही भिन्न हों, लेकिन अगली सरकार का गठन अब इनकी स्थिति पर निर्भर करेगा।
इज़राइल की अरब पार्टियों की भूमिका
इज़राइल में अरब नागरिकों की जनसंख्या लगभग 20% है, जो राष्ट्रीय चुनावों में मतदान कर सकते हैं और नेसेट के लिए अपने प्रतिनिधियों का चयन कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में असमानता का सामना करना पड़ा है। 2026 के चुनाव में भाग लेने वाली प्रमुख अरब राजनीतिक ताकतों में मंसूर अब्बास की 'रा'अम' और 'जॉइंट लिस्ट' शामिल हैं। 'जॉइंट लिस्ट' में हदाश, ताअल और बलाद जैसे दल शामिल हैं, जो राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए विभिन्न रणनीतियों का उपयोग कर रहे हैं।
रा'अम: मंसूर अब्बास का दृष्टिकोण
'रा'अम', जिसे 'यूनाइटेड अरब लिस्ट' भी कहा जाता है, मंसूर अब्बास द्वारा संचालित एक इस्लामी-रूढ़िवादी पार्टी है। यह पार्टी अरब समुदायों के लिए बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक अवसरों की मांग करती है। इसके अलावा, यह संगठित अपराध, आवास और बुनियादी ढांचे में सुधार, और शैक्षिक असमानताओं को कम करने पर ध्यान केंद्रित करती है। अब्बास ने गठबंधन की राजनीति में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है, यह मानते हुए कि अरब सांसदों को इजरायली सरकारों के साथ बातचीत करके लाभ प्राप्त करना चाहिए।
संयुक्त सूची: हदाश, ताअल और बलाद
'संयुक्त सूची' तीन विभिन्न राजनीतिक दलों को एक साथ लाती है। 'हदाश' समानता और सामाजिक न्याय पर जोर देती है, जबकि 'ताअल' फिलिस्तीनी राष्ट्रीय हितों का समर्थन करती है। 'बालाद' अरब-राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है। यह गठबंधन नागरिक समानता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए मजबूत सुरक्षा का समर्थन करता है।
'किंगमेकर' की भूमिका
इन दोनों पार्टियों की 19 सीटें इज़राइल में अगली सरकार के गठन में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। नेतान्याहू के गुट को 53 सीटें मिलने की उम्मीद है, जबकि आइज़ेनकोट के पास 48 सीटें हैं। इनमें से कोई भी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नेतान्याहू के प्रतिद्वंद्वी आइज़ेनकोट ने अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के साथ सहयोग की संभावना को खुला रखा है, जबकि अब्बास ने गठबंधन सरकार में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है।