इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इजरायल के साथ रक्षा समझौतों पर लगाई रोक, जानें क्यों?
इटली की नई नीति: इजरायल के साथ रक्षा समझौतों पर रोक
नई दिल्ली: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इजरायल के साथ सभी रक्षा समझौतों को निलंबित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए उनकी सरकार ने इजरायल के साथ रक्षा समझौते के स्वचालित नवीनीकरण को रोकने का फैसला किया है। यह कदम क्षेत्रीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
रक्षा संबंधों पर रोक का कारण
मेलोनी की सरकार ने मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और युद्ध की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी। यह कदम इटली की विदेश नीति में बदलाव का संकेत देता है। पहले इटली इजरायल का एक मजबूत समर्थक माना जाता था, लेकिन अब वह क्षेत्रीय संघर्षों के कारण दूरी बनाने की कोशिश कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर मेलोनी का बयान
वेरोना शहर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को आगे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह से खोलने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
मेलोनी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य इटली और यूरोप के लिए केवल ईंधन की आपूर्ति के लिए नहीं, बल्कि खाद (fertilizer) की आपूर्ति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि यह मार्ग बंद रहता है या इसमें कोई रुकावट आती है, तो वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और स्वतंत्र नौवहन को बहाल करने के लिए पूरी कोशिश की जानी चाहिए।"
क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा कि शांति वार्ता को निरंतर आगे बढ़ाना चाहिए ताकि स्थिति स्थिर हो सके। उन्होंने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को जल्द समाप्त करने की अपील की। वर्तमान में, इटली होर्मुज में सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए ब्रिटेन के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ सहयोग कर रहा है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव अभी भी बना हुआ है। इटली की यह पहल क्षेत्रीय शांति और अपने आर्थिक हितों दोनों को ध्यान में रखते हुए की गई है।
मेलोनी का बयान यूरोपीय देशों के बीच बढ़ती चिंता को भी दर्शाता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई समस्या बनी रहती है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।