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इराक से अमेरिकी सेना की विदाई: क्या है भविष्य की चुनौतियाँ?

अमेरिकी सेना की इराक से विदाई का दौर शुरू हो गया है, जो 2003 में शुरू हुए विवादास्पद सैन्य अभियान का अंत करेगा। इस लेख में हम इराक की सुरक्षा स्थिति, ईरान समर्थित मिलिशियाओं की ताकत और ISIS के खतरे पर चर्चा करेंगे। क्या इराक में शांति बनी रहेगी? जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर।
 

अमेरिकी सेना की इराक से वापसी


नई दिल्ली: इराक में दो दशकों से अधिक समय से तैनात अमेरिकी सेना अब अपने अंतिम सैनिकों की वापसी की तैयारी कर रही है। यह कदम 2003 में शुरू हुए अमेरिका के सबसे लंबे और विवादास्पद सैन्य अभियान का अंत करेगा। अमेरिका ने इराक में तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार को हटाने के लिए सैन्य कार्रवाई की थी।


गृहयुद्ध और हिंसा का दौर

इस संघर्ष के बाद इराक कई वर्षों तक गृहयुद्ध, हिंसा और विद्रोह से जूझता रहा। अमेरिकी सेना ने 2011 में इराक से वापसी की, लेकिन वहां की स्थिति स्थिर नहीं रह सकी।


ISIS का उदय और अमेरिकी वापसी

ISIS का कब्जा


2014 में ISIS ने इराक के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया, जिसके बाद इराकी सरकार ने अमेरिका से मदद मांगी। अमेरिकी वायुसेना और विशेष बलों की सहायता से इराकी सेना ने 2014 से 2017 के बीच कई शहरों को ISIS से मुक्त कराया। इसके बाद अमेरिकी सैनिक सलाहकार और प्रशिक्षक के रूप में इराक में बने रहे।


अमेरिकी सैनिकों की चरणबद्ध वापसी

बाइडेन प्रशासन और इराक सरकार के बीच हुए समझौते के अनुसार, अमेरिकी सैनिकों की वापसी का कार्य चल रहा है। पेंटागन के अनुसार, बगदाद और ऐन अल-असद एयरबेस से सैनिकों को हटाया जा रहा है।


इराक की सुरक्षा पर सवाल

क्या होगा अमेरिका के जाने के बाद?


अमेरिकी सेना की वापसी के साथ इराक की सुरक्षा को लेकर कई चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं। ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों की ताकत बढ़ने की संभावना है। हशद अल-शाबी जैसे मिलिशिया पहले से ही इराक में प्रभावशाली हैं और उनके पास संसद और सेना में भी दखल है।


ISIS का खतरा

अमेरिका के जाने पर भी खतरा बना रहेगा


ISIS का खतरा भी बना हुआ है। हालांकि संगठन को क्षेत्रीय स्तर पर पराजित किया गया है, लेकिन इसके स्लीपर सेल अभी भी इराक और सीरिया के रेगिस्तानी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। अमेरिकी सहायता के बिना इराकी सेना के लिए इनका सामना करना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भले ही इराक से जा रहा हो, लेकिन वह पूरी तरह से सहायता देना बंद नहीं करेगा। भविष्य में मदद खुफिया जानकारी और हथियारों तक सीमित रह सकती है।