इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता का नतीजा शून्य, युद्ध का खतरा बढ़ा
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का परिणाम
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी नेताओं के बीच 21 घंटे तक चली बातचीत का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने वार्ता को विफल कर दिया, जबकि ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियारों के विकास को रोकने का दबाव डाला, लेकिन ईरान इस पर सहमत नहीं हुआ। इस बीच, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ वेनेजुएला जैसी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
उपराष्ट्रपति वैंस का बयान
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने इस्लामाबाद में वार्ता के बारे में जानकारी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान ने परमाणु हथियारों के विकास से इनकार किया। इसी वजह से कोई समझौता नहीं हो सका। वैंस के बयान के कुछ समय बाद, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लेख साझा किया, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी के विकल्प की बात की।
ईरान के खिलाफ आर्थिक नाकाबंदी की योजना
पिछले वर्ष, अमेरिका की नौसेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी की थी। अब ईरान के खिलाफ भी इसी तरह की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। ट्रंप द्वारा साझा किए गए लेख का शीर्षक था, 'अगर ईरान नहीं झुकता है तो राष्ट्रपति के पास ट्रंप का हथियार: नौसैनिक नाकाबंदी है।' अमेरिका के कई युद्धपोतों ने वेनेजुएला की नाकाबंदी की, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हुआ।
भारत और चीन पर अमेरिका की नजर
एक रिपोर्ट के अनुसार, विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड फोर्ड वर्तमान में फारस की खाड़ी में है। यह वही पोत है जिसने वेनेजुएला की नाकाबंदी की थी। हाल ही में इसे मरम्मत के बाद ईरान के खिलाफ मिशन में लगाया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका, चीन और भारत जैसे ईरान के प्रमुख तेल स्रोतों को काटकर तेहरान पर दबाव बढ़ा सकता है।
युद्ध का खतरा बढ़ा
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच लगभग 40 दिनों तक संघर्ष चला। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ। शनिवार को ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचे, जहां 21 घंटे तक वार्ता हुई, लेकिन यह वार्ता भी बेनतीजा रही। वार्ता के विफल होने के बाद, वैश्विक स्तर पर युद्ध की आशंका फिर से बढ़ गई है।